नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) के लिए नियमों को बहुत आसान बना दिया है। यूपी में अगर आप भी अपना कोई कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो अब आपके लिए खुशखबरी है। यूपी सरकार ने माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए नियमों को बहुत आसान बना दिया है। अब आपको सिर्फ 72 घंटे में ही यूपी में एमएसएमई यूनिट लगाने की मंजूरी मिल जाएगी। UP बनेगा 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी, ये है योगी आदित्यनाथ का मास्टर प्लान
सिर्फ 72 घंटे में मिल जाएगी मंजूरी
उत्तर प्रदेश सरकार ने एमएसएमई यूनिट शुरू करने के लिए नया नियम बनाया है जिसमें किसी भी निवेशक को जरूरी क्लीयरेंस पाने के लिए 1,000 दिन का समय दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई इस्टेब्लिशमेंट एंड ऑपरेशन एक्ट 2020 के मुताबिक किसी व्यक्ति को यूपी में उद्योग लगाने के लिए जिला स्तर के एक नोडल एजेंसी की मदद लेनी है। जब आप इस नोडल एजेंसी के पास उद्योग लगाने से संबंधित अपना आवेदन जमा करेंगे तो 72 घंटे के अंदर अंदर आपको इसका एक्नॉलेजमेंट मिल जाएगा। उसके आधार पर आप अपनी यूनिट लगा सकते हैं। जानकारी दें कि उत्तर प्रदेश में कोई छोटी इकाई लगाने के लिए 29 अलग-अलग विभाग से मंजूरी लेना पड़ता है और इसकी मंजूरी मिलने के बाद ही आप उद्यम लगा सकते हैं। उत्तर प्रदेश के पास अब तक एमएसएमई से संबंधित कोई कानून नहीं था और उत्तर प्रदेश में अब तक केंद्रीय कानून के हिसाब से कामकाज हो रहा था।
छोटे उद्यम स्थापित करने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा लैंड यूज और सीलिंग थी। जिला स्तरीय नोडल एजेंसी बनाने और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की निगरानी में यह काम देने के बाद अब रेवेन्यू डिपार्टमेंट, पोलूशन कंट्रोल जैसे विभाग के सभी अधिकारी नए उद्यम लगाने से संबंधित मसलों का त्वरित निपटान करेंगे। नोडल अधिकारी के पास पहुंचने वाले आवेदन खारिज भी किए जा सकते हैं, लेकिन कानून बनाने का आईडिया यह है कि नए प्रोजेक्ट लगाने की स्पीड बढ़े। यह जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार के विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एमएसएमई) नवनीत सहगल ने दी है।
सरकार इस नये एक्ट के माध्यम से राज्य में अधिक से अधिक एमएसएमई उद्योग की स्थापना कर बड़ी तादाद में रोजगार सृजन करना चाहती है। इस नए अधिनियम के माध्यम से राज्य में अगले एक साल में ही 15 लाख नए रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। एमएसएमई के मामले सुलझाने के लिए नये एक्ट में हर मंडल में एक फैसिलिटेशन काउंसिल बनाई जाएगी। अभी तक राज्य में एक ही फैसिलिटेशन काउंसिल थी। अब मंडलायुक्त के स्तर पर ही एमएसएमई इकाईयों के भुगतान संबंधी समस्याओं का समाधान हो सकेगा। फैसिलिटेशन काउंसिल के निर्णयों का अनुपालन कराने की व्यवस्था भी इस नए एक्ट में की गई है। वसूली के लिए वसूली प्रमाण पत्र जारी किए जाने की व्यवस्था की गई है।
जानकारी के लिए बता दें कि नया एक्ट तंबाकू उत्पाद, गुटखा, पान मसाला, अल्कोहल, वातयुक्त पेय पदार्थ, कार्बोनेटेड उत्पाद, पटाखों का विनिर्माण, 40 माइक्रान से कम के पालीथिन कैरी बैग पर लागू नहीं होगा। नारंगी एवं हरित श्रेणी की इकाईयां उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा निर्धारित समय सीमा के अंदर अनुमति लेकर इकाई स्थापित कर सकेंगी।
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