उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज के हर वर्ग के जीवन में बदलाव लाने की कोशिश की है। ट्रांसजेंडर वर्ग जिसके लिए योजना बनाने तो दूर उसके बारे में सरकारें विचार भी नहीं करती है। लेकिन योगी सरकार ने ट्रांसजेंडर के लिए एक अलग बोर्ड का गठन किया।

Advertisement

योगी सरकार की ओर से प्रदेश में उत्तर प्रदेश ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड का गठन किया गया, ताकि इस वर्ग के लोगों की समस्याओं का भी समाधान किया जा सके। इस बोर्ड के गठन का मुख्य उद्देश्य ट्रांसजेंडर समाज के बारे में लोगों को जागरूक करना, उनके प्रति लोगों की सोच को बेहतर करना, भेदभाव को खत्म करना, आर्थिक स्थिति को बेहतर करना, समाज में ट्रांसजेंडर्स को उचित और बराबरी का स्थान दिलाना है।

Advertisement

लेकिन ट्रांसजेंडर्स के प्रति लोगों की विचारधारा को बदलना सिर्फ सरकार के वश में नहीं है, इसके लिए समाज को भी आगे आने की जरूरत है। सरकार के साथ समाज के हर वर्ग के लोगों को भी इस मसले पर संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।

उत्तर प्रदेश किन्नर वेलफेयर बोर्ड की स्थापना 2021 में की गई थी। इस बोर्ड का गठन 23 सदस्यों के सरकारी आदेश के बाद किया गया था। किन्नर के लिए अक्सर हिजड़ा शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे नकारात्मक तरीके से लिया जाता है। इसे कायरता की निशानी माना जाता है। साउथ एशिया में किन्नर को खास जेंडर के रूप में पहचान दी जाती है, लेकिन इतिहास में किन्नरों को काफी भेदभाव और कलंक का सामना करना पड़ा है।

Advertisement

समाज में भेदभाव के चलते किन्नरों को रोजगार के अवसर नहीं मिल पाते, जिसकी वजह से उन्हें भीख मांगनी पड़ती है, गुजर-बसर के लिए कार्यक्रमों में हिस्सा लेना पड़ता है। भारत में सु्प्रीम कोर्ट ने 2014 में किन्नरों को थर्ड जेंडर के तौर पर मान्यता दी है। लेकिन किन्नरों के अधिकारों को दिलाना आज भी समाज में बड़ी चुनौती है। लेकिन योगी सरकार द्वारा जिस तरह से किन्नर बोर्ड का गठन किया गया है, वह कई मायनों में इस समाज की मुश्किलों को दूर करने का काम कर रही है।