उत्तर प्रदेश में आस्था का पवित्र त्रिशंकु तैयार हो गया है। प्रयागराज, वाराणसी के बाद अब उत्तर प्रदेश में अयोध्या भी आस्था का केंद्र बनकर तैयार हो गया है। जिस तरह से उत्तर प्रदेश आस्था का केंद्र बन रहा है वह निसंदेह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई तक ले जाने का काम करेगा। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में इन तीनों ही आध्यात्मिक शहरों की भूमिका काफी अहम होने वाली है।
वाराणसी में जिस तरह से काशी विश्वनाथ कोरिडोर बनने से बड़ी संख्या में यहां श्रद्धालुओं की आमद बढ़ी, कुछ ऐसा ही अयोध्या में भी होता दिख रहा है। यहां राम मंदिर के निर्माण के साथ ही लाखों की संख्या में श्रद्धालु राम लला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
अयोध्या में जहां 2019 में पर्यटकों की संख्या तकरीबन 3.5 लाख थी तो 2022-23 में यह दो करोड़ को पार कर गई है। अयोध्या में लोगों की रुचि में जबरदस्त इजाफा हुआ है। यहां सभी जमीनों की कीमत बढ़ गई हैं। अयोध्या आने वाले लोगों में 80 फीसदी श्रद्धालु हैं।
प्रयागराज की बात करें तो यहां हर वर्ष तकरीबन चार करोड़ लोग आते हैं। वहीं पिछले एक वर्ष से वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या 8 करोड़ को पार कर गई है। यहां 2017 में जहां 60 लाख पर्यटक आए थे, वहीं अब यह संख्या पिछले वर्ष 8.4 करोड़ को पार कर गई है। मंदिर के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की वजह से होटल, रेस्टोरेंट, टैसी, फूड आदि के बिजनेस में जबरदस्त बढ़ोत्तरी होती है।
अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी में 2023 पर्यटकों की बात करें तो यह आंकड़ा 15 करोड़ को पार कर गया है। सितंबर 2023 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो अयोध्या में 2.04 करोड़ पर्यटक पहुंचे जबकि वाराणसी में 8.42 करोड़ और प्रयागराज में 4.5 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। पूरे उत्तर प्रदेश की बात करें तो 32 करोड़ पर्यटक पहुंचे। जिसमे से अकेले इन तीन शहरों में तकरीबन 50 फीसदी पर्यटक पहुंचे हैं।
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