एक कल्याणकारी राज्य वही है, जिसकी नीतियों में दूरदर्शिता हो। कहते हैं कि एक अच्छा शासक वही है, जिसमें एक अच्छे डॉक्टर का भी गुण हो। मतलब, लोग क्या चाहते हैं, उसे पूरा करने से ज्यादा यह देखना जरूरी है कि जनता और राज्य या देश का हित किसमें है।
हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने पिछले 9 वर्षों से अधिक के कार्यकाल में इसी नीति पर चलने की कोशिश की है। उसने यह नहीं देखा कि चुनावी साल है तो बजट में लोकलुभावन घोषणाएं कर दी जाएं। बल्कि, इस बात पर फोकस रखा कि हरियाणा और हरियाणा के लोगों का कल्याण किसमें है, उनका हित किसमें है।
जनता के हित में 'मिशन हरियाणा-2047'
यही वजह है कि खट्टर सरकार ने राज्य के आर्थिक विकास को और गति और मजबूती देने के लिए 'मिशन हरियाणा-2047' की घोषणा की है। जाहिर है कि सिर्फ चुनाव जीतने की मंशा रखने वाली सरकार ऐसी घोषणा नहीं कर सकती।
गरीब हैं खट्टर सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री की सोच स्पष्ट है। उनका साफ कहना है, उनकी विकास की नीति जरूरत आधारित है, मांग पर आधारित नहीं। राज्य के संशाधनों पर पहला अधिकार हमेशा गरीबों का रहेगा, समाज के अंतिम कतार में बैठे सबसे अंतिम व्यक्ति का रहेगा। 'अंत्योदय' की भावना का सार भी तो यही है।
विकसित भारत के लिए विकसित हरियाणा पर जोर
हरियाणा सरकार समझती है कि राष्ट्र निर्माण में उसका भी योगदान जरूरी है। इसलिए ऐसे विकास की योजना अपना रही है, जिससे भारत को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का सपना साकार हो सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को जो दिशा दी है, उससे यह लक्ष्य अब संभवत: ज्यादा दूर नहीं है।
चुनावी सोच से आगे निकल कर देख रही है हरियाणा सरकार
इसी लक्ष्य के तहत देश 2047 तक 'विकसित भारत' बनने के मार्ग पर बढ़ चला है, जिसमें 'विकसित हरियाणा' का योगदान भी बहुत मायने रखने वाला है, जिसके लिए खट्टर सरकार दिन-रात काम करने में जुटी है, उसकी सोच की सीमाएं सिर्फ चुनावों तक सीमित नहीं है।
हरियाणा सरकार ने सिर्फ 'मिशन हरियाणा-2047' की घोषणा ही नहीं की है, इसके लिए उसने धरातल पर काम करना भी शुरू कर दिया है। इसके लिए इंवेस्ट इंडिया के सीईओ दीपक बागला के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स भी बनाया गया है। इंवेस्ट इंडिया एक निवेश प्रोत्साहन और सुविधा एजेंसी है, जिसे भारत सरकार सहायता दे रही है।
कौन सी ऐसी सरकार होगी, जहां विपक्ष सरकार पर सवाल उठाता हो कि चुनावी साल में भी बजट में लोगों को खुश करने के लिए लोकलुभावन घोषणाएं नहीं की गई है। लेकिन, सीएम खट्टर ने साफ किया है कि 'हमने लोकलुभावन बजट पेश नहीं किया, क्योंकि हमारे लिए चुनाव नहीं, जनता पहले है।'
यह भेदभाव, भाई-भतीजावाद से ऊपर उठकर सोचने वाली सरकार का नतीजा है, जिसकी नजर में सारे नागरिक समान हैं- 'हरियाणा एक, हरियाणवी एक'।
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