हरियाणा सरकार का बीता 9 साल देश की शासन-व्यवस्था के लिए एक नजीर बन चुका है। हाल ही में फरीदाबाद के सूरजकुंड में इसपर एक पुस्तक विमोचन के दौरान देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने भी इसी की ओर ध्यान दिलाने की कोशिश की है।

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हरियाणा की वाहवाही पूरे देश में हो रही है, इसके पीछे सुशासन के वो सात सिद्धांत हैं, जिसके आधार पर बीते 9 वर्षों में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने सरकार चलाई है।

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लोकतांत्रिक मूल्यों पर अडिग रही है हरियाणा सरकार
उपराष्ट्रपति ने इन सात सिद्धांतों- शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वाभिमान, स्वावलंबन, सुशासन और सेवा को 'सात्विक' बताया है। उनके मुताबिक लोकतांत्रिक मूल्यों को कायम रखने के लिए इन उसूलों पर चलना जरूरी है।

देश के रोल मॉडल प्रदेश के रूप में उभरा है हरियाणा
जाहिर है कि आज अगर हरियाणा को देश का रोल मॉडल बताया जा रहा है, तो उसके पीछे मुख्यमंत्री एमएल खट्टर की सोच और इन 9 वर्षों में इसके लिए किया गया उनका असीम संघर्ष है।

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अगर हरियाणा में आज बदलाव नजर आ रहा है तो यह इस बात का प्रमाण है कि इस करीब एक दशक में इसके लिए कितनी मेहनत की गई है। क्योंकि, किसी भी शासन-व्यवस्था में बदलाव इतना आसान नहीं है। लेकिन, खट्टर सरकार ने यह करके दिखाया है।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि एक समय हरियाणा की पूरी शासन-व्यवस्था पर भ्रष्टाचार किस कदर हावी था। किसी भी सरकारी काम में पारदर्शिता का कितना अभाव था। किस कदर भाई-भतीजावाद का हर जगह बोलवाला था। आम नागरिकों की सरकार के नजर में तो कोई वजूद ही नहीं था।

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अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी संबल दे रही है हरियाणा सरकार
लेकिन, एक आज की तारीख है, जब दूर-दराज के गांवों में समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक भी सरकार पहुंच रही है। सिर्फ भौतिक सहायता ही नहीं, भावनात्मक संबल देने का भी काम कर रही है।

आज हरियाणा देश का एक अगुवा राज्य बनकर उभरा है तो इसकी वजह यही है कि शासन-तंत्र के हर मोर्चे पर राज्य सरकार ने काम किया है, बिचौलिए से काम करवाने वाली प्रथा को जड़ से ही उखाड़ फेंका गया है।

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हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने पिछले 9 सालों में 'हरियाणा एक-हरियाणवी एक' की सोच के साथ काम किया है, इसलिए राज्य के बुनियादी ढांचे में अप्रत्याशित विकास हुआ है तो यहां के नागरिकों का जीवन-स्तर भी बेहतर हुआ है।

इसी का परिणाम है कि राज्य के लोग आज देश में शिक्षा, खेल, सामाजिक कार्य, प्रशासन, न्यायपालिका से लेकर राजनीति तक में अपना लोहा मनवाने में सक्षम हुए हैं।