Haryana News: बाल विवाह रोकने के तमाम कानून मौजूद हैं, लेकिन समाज से अभी भी यह कुप्रथा पूरी तरह से मिट नहीं पाई है। लेकिन, एक सजग और संवेदनशील सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह चौकन्ना रहे और ऐसी कोई भी परिस्थिति को पैदा ही न होने दे, जिससे समाज के भविष्य को नुकसान पहुंचे।

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इस साल 10 मई को अक्षय तृतीया है। हिंदू आस्था के मुताबिक यह बहुत ही पवित्र और शुभ दिन है और लोग तमाम तरह के शुभ और अच्छे कार्यों को इसी मौके पर करना अच्छा मानते हैं। अक्षय तृतीया के दिन शादी-विवाह करना भी सौभाग्य समझा जाता है। लेकिन, इस शुभ मुहूर्त पर बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के भी समाचार मिलते रहे हैं।

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अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए सतर्क हरियाणा सरकार
हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार इस बार अक्षय तृतीया से पहले ही किसी भी सूरत में बाल विवाह की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्क है। इसके लिए महिला और बाल विकास विभाग की ओर से बाल विवाह निषेध अधिकारियों को खास निर्देश जारी किए गए हैं।

सभी विभागों को तालमेल के साथ कार्य करने का निर्देश
अधिकारियों से कहा गया है कि जैसे ही बाल विवाह से संबंधित किसी भी तरह की सूचना मिलती है, उसपर फौरन कार्रवाई करें और इसे रोकें। राज्य में बाल विवाह को पूरी तरह से रोकने के लिए सभी विभागों को तालमेल के साथ काम करने को कहा गया है।

इन नंबरों पर दी जा सकती है बाल विवाह की सूचना
अगर किसी को कहीं पर बाल विवाह होने की भनक लगती है तो वह 112 और 100 नंबर पर पुलिस कंट्रोल रूम, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और 1091 महिला हेल्पलाइन पर तत्काल सहायता के लिए सूचना दे सकता है।

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क्या कहता है बाल विवाह निषेध कानून?
हरियाणा सरकार को मालूम है कि आखा तीज के मौके पर विवाह की पुरानी परंपरा रही है। लेकिन, बाल विवाह गैर-कानूनी है, इसको लेकर जनता को जागरूक करना भी आवश्यक है। बाल विवाह निषेध कानून, 2006 के तहत लड़कियों की शादी 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष से पहले करना अपराध है।

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यही नहीं, बाल विवाह निषेध (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2020 के तहत बाल विवाह शून्य घोषित किया जा चुका है। राज्य में बाल विवाह में शामिल लोगों के लिए दो साल तक की सजा और 1 लाख रुपए तक के जुर्माने का भी प्रावधान है।

अक्षय तृतीया पर लोगों से जागरूक रहने की अपील
अक्षय तृतीया पर इस सामाजिक कुप्रथा को रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने आम लोगों से भी जागरूक रहने की अपील की है। इसके साथ ही सरकार ने सामुदायिक केंद्रों, सार्वजनिक इमारतों, बैंक्वेट हॉल और विवाह स्थलों के मालिकों और मैनेजरों से कहा है कि वह भी तसल्ली करें कि दूल्हा-दुल्हन की उम्र शादी के लायक हो।

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इनके अलावा पुरोहितों, गांव के पंचों, सरपंचों, निगम पार्षदों से भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वह इस बात के लिए लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित करें कि बाल विवाह न होने दें। कोई सरकार जब किसी सामाजिक कुप्रथा को मिटाने के लिए इतनी गंभीर है तो समाज में बदलाव आना निश्चित है, जो अच्छे के लिए है।