हरियाणा सरकार ने एक और बड़ा कल्याणकारी कदम उठाया है। राज्य की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने बुजुर्गों को मिलने वाली मासिक पेंशन की राशि बढ़ाकर 3,000 रुपए कर दी है। पहले से घोषित इस निर्णय पर हरियाणा कैबिनेट ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है।

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हरियाणा कैबिनेट के फैसले के मुताबिक अब प्रदेश के बुजुर्गों को हर महीने 2,750 रुपए की जगह 3,000 रुपए मिला करेगी। इसके साथ ही सीएम खट्टर ने यह भी बता दिया है कि आने वाला बजट भी पूरी तरह से गरीबों और जरूरतमंदों पर केंद्रित रहेगा।

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हरियाणा में बुजुर्गों को मिल रहा सम्मान
राज्य सरकार बुजुर्गों को इसलिए मासिक पेंशन देती है, जिससे वह अपनी छोटी-मोटी जरूरतों के लिए किसी पर आश्रित न रहें। यह सहायता आर्थिक मदद से भी कहीं ज्यादा उनके सम्मान की रक्षा करती है और उनका मनोबल बढ़ता है और किसी पर बोझ होने की भावना नहीं पनपने देती।

'वरिष्ठ नागरिक सेवा आश्रम' पर खर्च होगी सरप्लस रकम
हरियाणा सरकार ने सिर्फ 250 रुपए मासिक पेंशन ही नहीं बढ़ाया है। मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा है कि इस फंड की जितनी भी सरप्लस रकम बचेगी उसे 'वरिष्ठ नागरिक सेवा आश्रम' योजना पर खर्च किया जाएगा।

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बुजुर्गों के आश्रमों की व्यवस्था को और बेहतर करने पर फोकस
दरअसल, पहले करीब 40,000 बुजुर्गों ने स्वेच्छा से इस सरकारी सहायता को वापस करने का फैसला किया था। इससे राज्य सरकार के खजाने में करीब 100 करोड़ रुपए बचे थे।

यह व्यवस्था प्रदेश के सभी 22 जिलों में लागू होगी। इन अतिरिक्त पैसों से वरिष्ठ नागरिकों के सेवा आश्रमों में नई व्यवस्थाओं के निर्माण और सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

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हरियाणा सरकार ने लाभार्थियों के दायरे में किया है विस्तार
दरअसल, खट्टर सरकार ने बुजुर्ग नारगरिकों की सिर्फ पेंशन ही नहीं बढ़ाई है, इनके लिए योग्य पात्रों की वार्षिक आय की सीमा भी 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 3 लाख रुपए कर दी है। इसका असर ये हुआ है कि इस पेंशन के लाभार्थियों का दायरा काफी बढ़ गया है।

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पिछले साल के आखिरी तक हरियाणा में 18.52 लाख बुजुर्गों को 506 करोड़ रुपए की मासिक पेंशन दी जा रही थी।

वृद्धावस्था पेंशन के अलावा हरियाणा सरकार विधवाओं, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों, दिव्यांगों के साथ-साथ विधुरों और अविवाहितों को भी सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत मासिक पेंशन उपलब्ध करवाती है।

इस तरह से राज्य में 30 लाख से ज्यादा लोग इस तरह की सामाजिक सुरक्षा पेंशन पा रहे हैं। एक कल्याणकारी राज्य की यही पहचान है कि वह समाज के अंतिम कतार में बैठे सबसे आखिरी व्यक्ति को भी अकेला न रहने दे। उसके साथ हर कदम पर खड़ी रहे।