हरियाणा इन दिनों भयानक सर्दी की चपेट में है। मौसम विभाग की मानें तो अगले कुछ दिनों तक इससे राहत मिलने की संभावना नहीं है। यह स्थिति प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए बहुत बड़ी चुनौति खड़ी कर रही है।
रबी फसल खासकर गेहूं की सिंचाई का समय है। ट्यूबवेल के लिए बिजली की सप्लाई किसानों को रात के समय में ही मिलती रही है। लेकिन, इस सर्द मौसम में सिंचाई के लिए किसानों को रात में भी स्वास्थ्य को नजरअंदाज करते हुए मजबूरन खेतों में जाना ही पड़ रहा था।
सर्दी में सिंचाई के लिए किसानों को मिली बड़ी राहत
लेकिन, हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने किसानों की इस कठिनाई पर बहुत ही संवेदनशीलता के साथ ध्यान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सर्दी और मौसम की विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने ट्यूबवेल के लिए बिजली आपूर्ति का शेड्यूल बदल दिया है।
सिंचाई के लिए किसानों को दिन में ही मिलेगी बिजली
अब हरियाणा के किसानों को सिंचाई के लिए दिन में ही बिजली देने की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री के मुताबिक ऊर्जा विभाग ने कुल 19 सर्किलों के लिए दो ग्रुप बनाए हैं। इन दोनों के लिए दिन के ही अलग-अलग समय में बिजली आपूर्ति का इंतजाम किया गया है।
मसलन, सात सर्किलों में फतेहाबाद, भिवानी, सिरसा,करनाल, कैथल, सोनीपत और जींद शामिल हैं। इन सभी इलाकों में सिंचाई के लिए सुबह 5 बजे से दिन के 1 बजे तक बिजली आपूर्ति होगी और किसान अपनी रबी फसल की सिंचाई बिना ज्यादा सर्दी का सामना किए कर सकेंगे। उन्हें रात के समय अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ की जरूरत नहीं रह गई है।
हरियाणा ने फिर पेश किया कल्याणकारी सरकार का उदाहरण
अन्य सभी सर्किलों में सिंचाई के लिए दिन के 10 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक बिजली उपलब्ध रहेगी। अगर कोई सरकार जनता की इन समस्याओं को समझती है और उसके हिसाब से व्यवस्था में बदलाव के लिए तैयार रहती है तो यही कल्याणकारी सरकार का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री खट्टर का कहना है, 'इस फैसले से किसानों की दिक्कते कम होंगी; और वे दिन में भी अपने खेतों में सिंचाई कर सकेंगे।' राज्य सरकार ने फिलहाल इस तरह की व्यवस्था 31 जनवरी तक के लिए की है। उसके बाद मौसम के हालात देखकर इसे जरूरत पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
अन्नदाताओं के हित में लगातार सोचती रहती है हरियाणा सरकार
ये वही हरियाणा सरकार है, जिसने हाल ही में प्रदेश के किसानों को खेती में उनके अनुभव का लाभ उठाने के लिए अफ्रीकी देशों में खाली पड़ी लाखों हेक्टेयर जमीन पर उन्नत कृषि की संभावनाएं तलाशनी शुरू की हैं।
एक बार अफ्रीकी देशों के साथ औपचारिक करार हो जाने के बाद हरियाणा के किसान, वहां जाकर आधुनिक खेती कर सकेंगे और अपने साथ अपने देश और प्रदेश की समृद्धि में भी योगदान कर पाएंगे।
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