दिल्ली में आम आमदी पार्टी सरकार ने वर्ष 2016 में सोलर पॉलिसी जारी की थी। लेकिन अब नई पॉलिसी के तहत दिल्ली में बड़े पैमान में सोलर एनर्जी के प्रयोग को बढ़ावा मिलेगा। सोलर पॉलिसी-2024 के तहत आवासीय एरिया में रहने वाले परिवारों का बिजली बिल शून्य हो जाएगा, वहीं कामर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं का बिल आधा हो जाएगा। इससे पहले 2016 में सोलर पॉलिसी जारी की गई थी। नई पॉलिसी अपनाने वाले आवासीय एरिया के उपभोक्ताओं का बिजली बिल जीरो आएगा और उन्हें 700 से 900 रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी भी होगी।
दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं का चार साल के अंदर सोलर पैनल लगाने में आया खर्च भी रिकवर हो जाएगा। नई स्कीम के तहत आवासीय एरिया में रहने वाले परिवारों का बिजली बिल शून्य हो जाएगा। जबकि कामर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं का बिल आधा हो जाएगा। दिल्ली सरकार का मानना है कि इस पॉलिसी से दिल्ली में न सिर्फ महंगाई दर में कमी आएगी, बल्कि वायु प्रदूषण भी कम करने में मदद मिलेगी।
दिल्ली में केजरीवाल सरकार पहले ही 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने के साथ सर्दियों में ज्यादातर घरों में बिल जीरो या 100 रुपये तक आता है। ऐसे में सरकार का दावा है कि सोलर पॉलिसी लागू होने के बाद अब 200 यूनिट से ज्यादा खर्च करने वालों का बिल भी जीरो आएगा।
इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर आप एक महीने में कुल 400 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं तो 200 यूनिट आपको पहले से ही मुफ्त मिल रहा है, बाकी का 200 यूनिट आप सोलर पैनल से खर्च कर सकते हैं।
दिल्ली सरकार लोगों को सोलर पैनल पर 10 हजार रुपये तक की सब्सिडी देगी. साथ ही जेनरेशन बेस्ड इंसेंटिव भी पांच साल तक मिलेगा. इसके तहत हर महीने खाते में पैसे आएंगे। दिल्ली सरकार के मुताबिक तीन साल के अंदर सोलर पावर की 4.5 हजार मेगावाट इंस्टॉल्ड कैपेसिटी हो जाएगी। अगर आप तीन किलोवाट तक सोलर पैनल लगाते हैं तो इससे बिजली प्रोड्यूस करने पर तीन रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से आपको पैसे दिए जाएंगे।
चार साल में चुकता होगी कीमत
दिल्ली में नई सोलर पॉलिसी के तहत महंगाई और कम हो जाएगी। दिल्ली सरकार का लक्ष्य 2027 तक दिल्ली में 4,500 मेगावाट सोलर पावर बनाने का है। सीएम केजरीवाल एक एक बयान के मुताबिक, सरकार के कैलकुलेशन के तहत नई सोलर नीति के तहत दिल्लीवासियों का इन्वेस्टमेंट चार साल में रिकवर हो जाएगा और इसके साथ 25 साल तक फ्री बिजली का लाभ मिलता रहेगा। साथ बिजली संयंत्रों पर उत्पादन का दबाव भी कम होगा।
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