तेलंगाना में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व की सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े होने लगे हैं। यहां गोदावरी नदी पर बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के तहत कालेश्वर लिफ्ट सिंचाई योजना पर सवाल खड़े हो रहे है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत में जो कीमत तय हुई थी, उसमे बाद में तकरीबन 400 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। सीएजी की जो रिपोर्ट सामने आई है उसमे कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट की लागत पहले तय लागत से तकरीबन 400 गुना बढ़ गई है।

Advertisement

इस योजना के तहत सिंचाई के क्षेत्र को तकरीबन 50 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इस परियोजना की लागत अबतक 38000 करोड़ रुपए से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ पहुंच चुकी है। लेकिन बावजूद इसके अभी तक लंबित कार्य पूरे नहीं हो सके हैं। सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस योजना में खर्च हुई राशि का बड़ा हिस्सा कॉन्ट्रैक्टर खासतौर पर मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के द्वारा खर्च की गई है।

Advertisement

कालेश्वरम परियोजना के कॉन्ट्रैक्ट की बात करें तो इसको लेकर सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि बीआरएस सरकार ने कॉन्ट्रैक्टर को नाजायज फायदा पहुंचाया, जिसकी वजह से उन्हें 25188 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुनाफा हुआ। सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 180 टीएमसी फीट पानी उठाने के लिए 13,558 मिलियन यूनिट की वार्षिक ऊर्जा की खपत का गलत तरह से अनुमान लगाया था। इसके लिए बिजली की दर 3 रुपए प्रति यूनिट की दर से जोड़ी गई, जबकि वास्तविक दर 6.4 रुपए थी।