Pan Card Rule: ज्यादातर लोगों का किसी न किसी बैंक में एक सेविंग अकाउंट होता है। सेविंग अकाउंट का इस्तेमाल काफी लोग कैश डिपॉजिट के लिए करते हैं और कई बार एक साथ बड़ी रकम निकालने के लिए भी करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे जुड़े हुए कुछ नियम भी हैं जिनका पालन न करने पर आपको जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। बैंक अकाउंट में कैश जमा करने से जुड़ा हुआ एक बहुत जरूरी नियम है।

Advertisement

आपको अपने बैंक खाते में पैसे जमा करने के लिए पैन कार्ड की जरूरत पड़ेगी या नहीं? आप अगर इस प्रश्न का जवाब ढूंढ रहें तो इससे जुड़े हुए नियमों को समझना आपके लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यह आपको कई परेशानियों से बचा सकता है।

Advertisement

अपने पैसे के लेन-देन को सही रूप से पूरा करने के लिए आपको यह जानना बहुत जरूरी होगा कि पैन कार्ड की आवश्यकता कहां पड़ेगी।

आखिर पैन नंबर क्या है?

पैन कार्ड का मतलब है परमानेंट अकाउंट नंबर कार्ड। यह भारत में आयकर विभाग द्वारा जारी किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट है। पैन एक 10-अंक का अल्फान्यूमेरिक नंबर है जो प्रत्येक व्यक्ति या संस्था के लिए यूनिक ही होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से टैक्स से जुड़े उद्देश्यों के लिए किया जाता है, लेकिन यह विभिन्न वित्तीय लेनदेन के लिए भी जरूरी है।

Advertisement

क्या नकद जमा के लिए पैन कार्ड ज़रूरी है?

भारत में, बैंक में हर जमा किए गए कैश के लिए पैन कार्ड की जरूरत नहीं होती। एक दिन में 50,000 रुपये से ज़्यादा की बैंक जमा के लिए आपको अपना पैन कार्ड देना होगा। इसके अलावा, अगर एक वित्तीय वर्ष में आपकी कुल कैश करने की जमा राशि 20 लाख रुपये से ज़्यादा है, तो आपको अपना पैन नंबर बताना जरूरी है। यह आपके सभी बैंक खातों और डाकघर खातों में की गई सभी जमाराशियों पर भी लागू होता है।

Advertisement

साल 2022 में हुआ था बदलाव

आपको बता दें कि साल 2022 में, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एक नया नियम पेश किया था, जिसके अनुसार लोगों को एक वित्तीय वर्ष में 20 लाख रुपये से अधिक जमा या निकासी के लिए अपना पैन या आधार नंबर बताना होगा। यह बैंकों या डाकघरों में उच्च मूल्य के लेन-देन के साथ-साथ करेंट अकाउंट या कैश क्रेडिट अकाउंट खोलने पर भी लागू होता है।

Advertisement

इन नियमों का भी रखें ध्यान

अगर एक फाइनेंशियल ईयर में आप 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा जमा करते हैं तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को इसकी जानकारी केनी होती है, लेकिन अगर आपका करेंट अकाउंट है तो यह लिमिट 50 लाख रुपये है।

वित्तीय संस्थानों के लिए यह नियम है कि वे इन कैश लिमिट से ज्यादा के लेन-देन की रिपोर्ट को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में सबमिट करें।

Advertisement

इसके अलावा आपको यह भी बता दें कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 269ST के तहत किसी खास वित्त वर्ष यानी फाइनेंशियल ईयर में यदि किसी व्यक्ति के अकाउंट में कोई 2 लाख रुपये या इससे ज्यादा का कैश जमा करवाता है तो इस पर पेनल्टी लगती है।

यह पेनल्टी बैंक से पैसा निकालने पर नहीं लगाई जाती है। आपको बता दें कि TDS कटौती खास सीमा से ज्यादा की निकासी पर लागू होती है।