नई दिल्ली। आमतौर पर सभी के मन में म्यूचुअल फंड में निवेश करने का मन होता है। लेकिन इसे लेकर एक डर की फीलिंग रहती है। मन में भय रहता है कि कहीं उनका पैसा डूब न जाए। तो सबसे पहले जान लें कि यह सही है कि म्यूचुअल फंड में निवेश के साथ कुछ रिस्क जुड़े रहते हैं, लेकिन अगर एक बार इनको जान लिया जाए तो अच्छे फायदे के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश किया जा सकता है। म्यूचुअल फंड में निवेश से अच्छा फायदा होता है, लेकिन इसकी सही समझ जरूरी है। तो आइये आज जानते हैं कि म्यूचुअल फंड में निवेश से जुड़े जोखिम क्या हैं और कैसे अधिक से अधिक से फायदा उठा सकते हैं।
म्यूचुअल फंड में जब भी निवेश शुरू करना चाहें कर सकते हैं, लेकिन कुछ बातों के पूरा होने पर ही निवेश शुरू करें। सबसे पहले हमें अपनने जीवन और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। यानी एक टर्म प्लान और एक स्वास्थ्य बीमा जरूर लें। इसके बाद आपके पास एक आपात स्थिति के लिए इमरजेंसी फंड भी होना चाहिए। अगर यह दोनों शर्तें आप पूरी करते हैं तो म्यूचुअल फंड में तुरंत निवेश शुरू कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो पहले इन शर्तों को पूरा करें। दरअसल म्यूचुअल फंड में निवेश लम्बे समय के बाद ही फायदेमंद साबित होता है। ऐसे में अगर इस समय के दौरान आपको पैसों की जरूरत पड़ी तो आप सबसे पहले अपने म्यूचुअल फंड से ही पैसा निकालेंगे। इसलिए सही सलाह यही होती है कि पहले आप स्वास्थ्य और इमरजेंसी फंड की व्यवस्था कर लें, फिर म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करें।
म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करने से पहले इन 3 बातों का अंतर समझना जरूरी है। बचत सेविंग, निवेश और अटकलबाजी यानी स्पेकुलेशन में क्या अंतर है, यह जानना काफी जरूरी है। बचत और निवेश को समझना आसान है, वहीं अटकलबाजी को जोखिम से भरा काम समझिए। क्योंकि, यह वित्तीय साधनों में पैसा लगाने के बारे में पैसा लगाते समय संबंधित जोखिम को आप कितना समझते हैं, यह इस पर निर्भर करता है।
म्युचूअल फंड में निवेश में एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें जोखिम उठाने की रणनीति पहले ही तय होती है। यह रणनीति अपने क्षेत्र के माहिर प्रोफेशनल तय करते हैं। इसलिए सीधे इक्विटी में निवेश और उसके जोखिम को समझने के लिए आपको पहले म्युचूअल फंड में निवेश करना चाहिए। यह सुरक्षित और फायदेमंद रहता है।
इक्विटी म्युचूअल फंड उनको कहत हैं जिनका फंड स्कीम का इक्विटी एक्सपोजर कम से कम 65 फीसदी से ज्यादा हो। लेकिन यह अधिकतम 100 फीसदी तक भी हो सकता है। इसके अलावा इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) भी होती हैं। इसमें इक्विटी एक्सपोजर कम से कम 90 फीसदी रहता है। इस स्कीम में निवेश पर इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है। अगर ऐसी स्कीम में निवेश करते हैं तो यह पैसा 3 साल के लिए लॉकइन रहता है, यानी आप इस पैसे को 3 साल के बाद ही निकाल सकते हैं।
इक्विटी म्युचूअल फंड की कई स्कीम ऐसी भी हैं जो अंतर्राष्ट्रीय स्टॉक्स में भी निवेश करती हैं। ऐसी स्कीम में निवेश करके आप पर्याप्त डाइवर्सिफिकेशन कर सकते है। म्यूचुअल फंड में निवेश की एक रणनीति यह भी हो सकती है।
म्यूचुअल फंड में निवेश का सबसे अच्छा तरीका सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (सिप) ही होता है। इस माध्यम से आप हर माह तय तरीख को तय पैसा म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। यह ठीक बैंक या पोस्ट ऑफिस की आरडी की तरह ही होता है। एसआईपी के जरिए निवेश के कई लाभ हैं। इस तरीके से म्यूचुअल फंड में निवेश से औसत खरीद काफी सस्ती हो जाती है, जिससे बाद में काफी फायदा मिलता है।
इक्विटी म्युचूअल फंड कम से कम 7 से 10 साल या इससे ज्यादा लंबी अवधि तक सिप माध्यम से निवेश करना अच्छा माना जाता है। इक्विटी म्युचूअल फंड लंबी अवधि में कंपाउंडिंग की पावर में महत्वपूर्ण इजाफा करते हैं। आप एक वित्तीय लक्ष्य तय करके निवेश शुरू कर सकते हैं। इस लक्ष्य को पाने के लिए राशि और निवेश की अवधि तय करनी होती है। आपके वित्तीय लक्ष्य के अनुसार, एसआईपी निवेश की गणना करने के लिए कई ऑनलाइन कैलकुलेटर हैं। इसके जरिए आप अनुमानित रिटर्न की गणना कर सकते हैं।
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