नई दिल्ली, जून 18। बढ़ती मुद्रास्फीति दर पर काबू पाने के प्रयास में केंद्रीय बैंक द्वारा क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) की घोषणा के बाद से बहुत से देशों में शेयर बाजार गिरावट का रुख है। पश्चिमी देशों की इकोनॉमी में रिकॉर्ड-हाई मुद्रास्फीति ने नीति निर्माताओं को कम समय के अंदर ही प्रमुख ब्याज दरों में अचानक वृद्धि करने के लिए प्रेरित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी पिछले दो महीनों में दो बार रेपो रेट में 90 बीपीएस की बढ़ोतरी की है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा बिकवाली से घरेलू बेंचमार्क अपने उच्च स्तर से 17% से अधिक गिर गए हैं, जबकि चुनिंदा क्षेत्रों में 2022 में अब तक 20% से अधिक की गिरावट आई है। ये सभी घटनाएं निवेशकों को परेशान कर रही हैं पर आपको ऐसे में कुछ चीजों से बचना चाहिए।
गिरते बाजार में यह एक सामान्य ट्रेंड है क्योंकि लोगों की भावनाएं उनके फैसले पर हावी हो जाती हैं। अगर आपके पास मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक हैं, तो आपका घबराना गलत है। इसके अलावा, पैनिक सेलिंग कम कीमत पर बेचने का मामला है। इससे कम स्तर पर बिकवाली करके पोर्टफोलियो में आपका घाटा बढ़ जाता है।
आम तौर पर हर गिरावट पर शेयरों को खरीदने की कीमत को औसत करने का चांस होती है। लेकिन स्टॉक की बेसिक ताकत को जाने बिना ऐसा करने से आपको पोर्टफोलियो में अधिक नुकसान होगा। गिरते हुए चाकू को पकड़ने से बचना हमेशा बेहतर होता है, और ऐसी घटनाओं के कारणों का मूल्यांकन करने के लिए रुकें।
बाजार अल्टीमेट सुप्रीम है और जब तक शर्तें पूरी नहीं हो जाती हैं, तब तक यह अपने हिसाब से चलेगा। इसलिए, फैसले का समर्थन करने के लिए ठोस आधार के बिना भविष्यवाणी के आधार पर निवेश करना भी उतना ही अनिवार्य है। बॉटम मानकर बड़ी रकम का निवेश करने से पोर्टफोलियो में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे आत्मविश्वास भी डगमगा जाएगा।
लंबी अवधि के आधार पर टिके रहने और फलने-फूलने के लिए निवेशकों के लिए बाजार के साथ लचीला होना अनिवार्य है। बाजार के आपके खिलाफ जाने के बावजूद कठोर नजरिया रखने के अच्छे परिणाम नहीं होंगे। एक निवेशक के रूप में, आपको बाजार में प्रचलित भावना को स्वीकार करना चाहिए। और मौजूदा स्थिति में पोर्टफोलियो के लिए सबसे अच्छी रणनीति को फिर से तैयार करना है।
निवेशकों को हमेशा बाजार की मौजूदा स्थिति के आधार पर बदलाव किए बिना अपने शुरुआती वित्तीय लक्ष्यों/योजना के साथ बने रहना चाहिए। जब किसी शेयर की कीमतें सिंगल/डबल-डिजिट में होती हैं तो आम तौर पर बेसिक फीचर्स को नजरअंदाज कर देते हैं जिससे कमजोर शेयर भी खरीदने के लिए आकर्षक लगता है। बेतरतीब ढंग से खरीदारी करने से पोर्टफोलियो में अनावश्यक रूप से अधिक डायवर्सिफाई स्टॉक जुड़ जाते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए कभी भी कुछ भी खरीदना सही नहीं है। बल्कि रिसर्च के आधार पर ग्रोथ वाले शेयर खरीदें।
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