शेयर बाजार में आज कई स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (SME) के IPO दस्तक दे रहे हैं। ये कंपनियां अपनी ग्रोथ और विस्तार के लिए पूंजी जुटाने की तैयारी में हैं। जहां मेनबोर्ड IPO का साइज काफी बड़ा होता है, वहीं SME IPO छोटे स्तर पर फंड जुटाते हैं। हालांकि, इसमें निवेश के लिए आपको कम से कम एक लाख रुपये की जरूरत होगी। निवेश की यह बड़ी रकम रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिस्क प्रोफाइल को पूरी तरह बदल देती है।

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मेनबोर्ड शेयरों में आप एक-एक यूनिट की ट्रेडिंग कर सकते हैं, लेकिन इसके उलट SME शेयरों में 'लॉट साइज' फिक्स होता है। इसका मतलब है कि आपको एक साथ हजारों शेयर खरीदने या बेचने होंगे। हालांकि मार्केट मेकर यह सुनिश्चित करता है कि बाजार में हमेशा खरीदार और विक्रेता मौजूद रहें, लेकिन कम ट्रेडिंग वॉल्यूम की वजह से कभी-कभी अपनी पोजीशन से बाहर निकलना (एग्जिट) मुश्किल हो सकता है। निवेश करने से पहले इस 'लिक्विडिटी रिस्क' पर नजर रखना बेहद जरूरी है।

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UPI से अप्लाई करने का तरीका और SME IPO की वैल्यूएशन

IPO के लिए बोली लगाने का सबसे तेज तरीका UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) है। इसके लिए अपने ब्रोकर ऐप पर जाएं और अपनी UPI ID दर्ज करें। इसके बाद फंड ब्लॉक करने के लिए आपके पास एक मैंडेट रिक्वेस्ट आएगी। अगर आप पांच लाख रुपये से ज्यादा की बोली लगा रहे हैं, तो नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करें। ASBA (एप्लीकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट) के जरिए फंड ब्लॉक करने का फायदा यह है कि अलॉटमेंट होने तक आपके पैसे पर ब्याज मिलता रहता है।

निवेश से पहले कंपनी के प्राइस-टू-इर्निंग (P/E) रेशियो की तुलना उसी सेक्टर की दूसरी कंपनियों से जरूर करें। अक्सर शुरुआती तेजी के दौरान कई SME कंपनियां काफी महंगी नजर आती हैं। ऐसी कंपनियों से बचें जिनके मुनाफे में लिस्टिंग की तारीख से ठीक पहले अचानक उछाल आया हो। रिस्क और रिवॉर्ड के अनुपात को सही ढंग से समझने के लिए इसकी तुलना पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से करना बेहतर रहता है। ज्यादा रिटर्न की संभावना के साथ भारी उतार-चढ़ाव (वोलेटिलिटी) का जोखिम भी जुड़ा होता है।

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निवेश का प्रकारसमय सीमाअनुमानित रिटर्नजोखिम
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)5 से 15 साल7.0 प्रतिशत सालानाकम जोखिम
SME ग्रोथ इक्विटी5 से 15 साल18.0 प्रतिशत सालानाभारी उतार-चढ़ाव

अलॉटमेंट की टाइमलाइन और SME IPO से बाहर निकलने का प्लान

अब T+3 लिस्टिंग साइकिल लागू है, जिसका मतलब है कि IPO बंद होने के तुरंत बाद शेयरों की ट्रेडिंग शुरू हो जाती है। आपको दो दिनों के भीतर अलॉटमेंट स्टेटस का पता चल जाएगा। ध्यान रहे कि शॉर्ट-टर्म होल्डिंग्स पर लिस्टिंग गेन पर बीस प्रतिशत टैक्स लगता है। इसलिए, तीसरे दिन मार्केट खुलने से पहले ही अपनी एग्जिट स्ट्रेटेजी तैयार रखें। अगर कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स कमजोर या अस्थिर लगें, तो उसे हमेशा के लिए होल्ड करने की गलती न करें।

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SME में सफल निवेश के लिए लॉन्ग-टर्म वैल्यू पर फोकस करना जरूरी है। प्रमोटर्स पर भारी कर्ज या बिजनेस प्लान में स्पष्टता की कमी जैसे 'रेड फ्लैग्स' पर पैनी नजर रखें। कमजोर लिस्टिंग को पहले ही फिल्टर करने के लिए चेकलिस्ट का इस्तेमाल करें। यह अनुशासित तरीका आपके कैपिटल को सुरक्षित रखते हुए हाई-ग्रोथ हासिल करने में मदद करेगा। समझदार निवेशक हमेशा 'FOMO' (मुनाफा छूट जाने का डर) के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।