मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड्स के लिए नए इंट्राडे बॉरोइंग (intraday borrowing) नियमों को फिलहाल टाल दिया है। अब ये नियम 15 मई, 2026 से प्रभावी होंगे। इस अपडेट का मतलब है कि फंड हाउस फिलहाल अपनी पुरानी लिक्विडिटी प्रैक्टिस को ही जारी रखेंगे। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि इस फैसले से रिडेम्पशन और वैल्यूएशन की मौजूदा प्रक्रिया पहले की तरह चलती रहेगी। इसका सीधा असर इस बात पर पड़ता है कि फंड से पैसा निकालते समय आपका ट्रांजैक्शन कैसे प्रोसेस होता है।

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फिलहाल, म्यूचुअल फंड्स अचानक कैश की जरूरत पड़ने पर शेयर बेचे बिना इंट्राडे बॉरोइंग का इस्तेमाल करते हैं। नियमों के टलने से फंड मैनेजर्स को तुरंत किसी सख्त उधार सीमा का सामना नहीं करना पड़ेगा। एक रिटेल निवेशक के लिए इसका फायदा यह है कि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के दौरान भी नेट एसेट वैल्यू (NAV) स्थिर बनी रहेगी। यह उन फंड्स के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है जो रोजाना हजारों की संख्या में खरीद-बिक्री के ऑर्डर संभालते हैं।

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रिडेम्पशन और NAV पर SEBI के इस फैसले का क्या होगा असर?

मान लीजिए आज आप किसी लिक्विड फंड से ₹50,000 निकालने (Redemption) की रिक्वेस्ट डालते हैं। मौजूदा नियमों के तहत, आमतौर पर आपको एक वर्किंग डे के भीतर पैसा मिल जाता है। बॉरोइंग नियमों में यथास्थिति बने रहने से फंड हाउस इसी रफ्तार से पेमेंट सेटल कर पाएंगे। इससे उन संभावित देरी से बचा जा सकेगा जो बाजार में अचानक उधार की सीमाएं सख्त होने की स्थिति में हो सकती थीं।

मौजूदा मार्केट में SIP बनाम लम्प सम: क्या कुछ बदलेगा?

अगर आप सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश करते हैं, तो जान लें कि आपकी किश्त कटने की तारीखों में कोई बदलाव नहीं होगा। वहीं, एकमुश्त (Lump sum) निवेश करने वालों के लिए फंड रियलाइजेशन का समय ही तय करेगा कि उन्हें किस दिन की कीमत (NAV) मिलेगी। नियमों में इस देरी का आपके रेगुलर इन्वेस्टमेंट शेड्यूल या बैंक मैंडेट पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह मुख्य रूप से भारत की विभिन्न एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) द्वारा संभाले जाने वाले इंटरनल लिक्विडिटी ऑपरेशंस से जुड़ा मामला है।

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फीचरमौजूदा स्थितिनिवेशकों पर असर
रिडेम्पशन की रफ्तारT+1 सेटलमेंट जारी रहेगापैसे की तुरंत निकासी संभव
SIP डेबिटतारीखों में कोई बदलाव नहींनियमित निवेश जारी रहेगा
NAV एप्लीकेशनरियलाइजेशन पर आधारितकीमतों में पारदर्शिता बनी रहेगी

रेगुलेटरी बदलावों की जानकारी रखना आपके फाइनेंशियल प्लान के लिए बेहद जरूरी है। जब तक नए बॉरोइंग नियम लागू नहीं होते, तब तक अपने फंड के प्रदर्शन और एग्जिट लोड पर नजर बनाए रखें। रिडेम्पशन के लिए हमेशा 'कट-ऑफ टाइम' जरूर चेक करें ताकि आपको मनचाही कीमत मिल सके। इस स्थिरता का फायदा उठाएं और बिना किसी अचानक ऑपरेशनल बदलाव की चिंता किए अपने लॉन्ग-टर्म गोल्स पर फोकस करें।