नई दिल्ली, नवंबर 16। मार्च 2020 के बाद से भारत में ब्याज दरें रिकॉर्ड निचले स्तर पर हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि तब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आर्थिक ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए दरों में कटौती की थी। पहले से ही कम दरों के चलते कई बैंकों ने त्योहारी सीजन के दौरान रियल एस्टेट प्रॉपर्टी खरीदने के इच्छुक लोगों को होम लोन ऑफर पेश किए। यानी कहा जा सकता है कि यह समय हाउसिंग प्रॉपर्टी के लिए यह समय घर खरीदने के लिए सही है। मगर क्या प्रॉपर्टी में निवेश का भी सही समय है? जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में प्रॉपर्टी में ग्रोथ देखने को मिलेगी। इससे यह निवेश का भी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। मगर ऐसे कई कारण हैं, जिनके चलते प्रॉपर्टी में निवेश सही नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं ऐसे ही 4 बड़े कारण।
सबसे पहली बात है कि प्रॉपर्टी में निवेश के लिए आपको मोटी रकम एक साथ चाहिए। जबकि म्यूचुअल फंड, पीपीएफ, शेयर मार्केट और एफडी या बॉन्ड या सोने में ऐसा नहीं है। आप इन विकल्पों में 1000-2000 रु से भी शुरुआत कर सकते हैं। मगर प्रॉपर्टी में ऐसा नहीं है। आपके पास लाखों रु का बजट होना चाहिए। यानी आपको एक साथ मोटी रकम निवेश करनी होगी।
रियल एस्टेट एक बहुत ही नॉन-लिक्विड एसेट है। नॉन-लिक्विड का मतलब है कि आप इसे फौरन बेच कर पैसा हासिल नहीं कर सकते। जैसा कि शेयरों आदि में होता है कि आप जब चाहे एक क्लिक पर शेयर बेच कर पैसा हासिल कर सकते हैं। यदि आप प्रॉपर्टी में निवेश करें और इस सेक्टर में गिरावट आए तो आपको बेचने में और भी दिक्कत आएगी। ये भी संभव है कि आप मुनाफा कमाने की सोचें, पर सही समय पर आपको खरीदार न मिले।
रियल एस्टेट का रखरखाव महंगा हो सकता है। रियल एस्टेट पर टैक्स का भुगतान किया जाना होता है। साथ ही प्रॉपर्टी का मैंटेनेंस बहुत जरूरी है। ये एक फालतू खर्चा है। हर छोटी-मोटी टूट पर मरम्मत करनी होगी। कुछ मामलों में मकान मालिक को नुकसान हो सकता है। क्योंकि किरायेदार संपत्ति को नुकसान पहुंचा देते हैं या किराए का भुगतान नहीं कर पाते। फिर उन्हें प्रॉपर्टी से निकालने की लंबी प्रोसेस से गुजरना पड़ सकता है।
बीते सालों में प्रॉपर्टी में रिटर्न कम ही रहा है। लोग अकसर ये देखते हैं कि मैंने एक प्लॉट या फ्लैट 20 लाख रु का खरीदा और अब उसकी वैल्यू 30 लाख रु है। मगर वे ये नहीं देखते कि उनका सालाना रिटर्न कितना बैठता है। म्यूचुअल फंड में सालाना रिटर्न 12-15 फीसदी आराम से मिल जाता है। जबकि पिछले कुछ सालों में प्रॉपर्टी में रिटर्न सिंगल अंक में यानी 10 फीसदी से कम रहा है।
प्रॉपर्टी में निवेश हाई नेट वेल्थ वाले लोग ही कर सकते हैं। जबकि सैलेरी वाले और कम इनकम वाले लोगों के लिए ये ऑप्शन सही नहीं है। जो लोग प्रॉपर्टी में पैसा लगा भी रहे हैं उन्हें भी कम रिटर्न, रखरखाव का खर्च और खास कर लिक्विडिटी जैसी चीजों पर ध्यान देना चाहिए।
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