RBI की 5 जून, 2026 की पॉलिसी आने में बस कुछ ही घंटे बचे हैं। आम आदमी के मन में अपनी EMI, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और मार्केट की चाल को लेकर कई सवाल हैं। यह 'प्लेबुक' आपको बताएगी कि आज आपको क्या कदम उठाने चाहिए। यहां देखें कि 25 या 50 बेसिस पॉइंट्स के बदलाव से आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा। इसे समझें ताकि आप बिना किसी हड़बड़ी के सही फैसला ले सकें।

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रेपो रेट में बदलाव का असर अलग-अलग लोन पर अलग-अलग समय पर पड़ता है। रेपो-लिंक्ड होम लोन की दरें अक्सर हर महीने बदलती हैं, जबकि MCLR (मार्जिनल कॉस्ट बेस्ड) लोन बैंक के रीसेट साइकिल के हिसाब से चलते हैं। नई FD पर दरों का असर तुरंत दिखता है, लेकिन सिर्फ नई बुकिंग पर। लोन स्विच करने से पहले अपना लिंकेज, स्प्रेड और रीसेट डेट जरूर चेक करें। फिक्स्ड रेट वाले ग्राहकों को तभी स्विच करना चाहिए जब ब्याज दरों का अंतर (spread) काफी ज्यादा हो।

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RBI पॉलिसी: हर 25 bps के बदलाव पर EMI पर असर

मान लीजिए आपका होम लोन 30 लाख रुपये का है, जिसकी अवधि 20 साल और ब्याज दर 9% है। नीचे दी गई टेबल से समझें कि 25 या 50 बेसिस पॉइंट्स के उतार-चढ़ाव से आपकी EMI कितनी बदल जाएगी। (आंकड़े राउंड ऑफ किए गए हैं)। इस टेबल की मदद से आप प्री-पेमेंट या बचत की प्लानिंग कर सकते हैं। इसके बाद तय करें कि आपको पार्ट-पेमेंट करना है, फिक्स्ड रेट चुनना है या फ्लोटिंग पर ही रहना है।

स्थितिसालाना दरEMI (₹)9% के मुकाबले बदलाव
-50 bps8.50%26,035-957
-25 bps8.75%26,511-480
बेस रेट9.00%26,9920
+25 bps9.25%27,476+484
+50 bps9.50%27,964+972

RBI पॉलिसी: FD रेट्स और 'लैडरिंग' से बढ़ाएं अपना मुनाफा

अगर आपको लगता है कि दरें अब और नहीं बढ़ेंगी, तो लिक्विडिटी बनाए रखते हुए ऊंची ब्याज दरों को लॉक कर लें। अपने 5 लाख रुपये को 6, 9, 12, 24 और 36 महीनों की पांच अलग-अलग FD में बांट दें (इसे लैडरिंग कहते हैं)। अगर दरें बढ़ती हैं, तो मैच्योरिटी के बाद पैसा ज्यादा ब्याज पर फिर से इन्वेस्ट करें। नीचे देखें कि 1 लाख रुपये पर अलग-अलग समय और दरों के हिसाब से कितना रिटर्न मिल सकता है।

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सालाना FD दर5 साल बाद मैच्योरिटी (₹1 लाख पर)10 साल15 साल
6.5%1,37,0091,87,7142,57,184
7.0%1,40,2551,96,7152,75,903
7.5%1,43,5632,06,1032,95,888

बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, इक्विटी में एकमुश्त (lump sum) पैसा लगाने के बजाय SIP का रास्ता चुनना बेहतर है। अगर आपको बोनस मिला है, तो उसे किश्तों में ट्रांसफर (STP) करने पर विचार करें। अगर आपका लक्ष्य तीन साल के भीतर है, तो शॉर्ट ड्यूरेशन डेट फंड में एकमुश्त निवेश को प्राथमिकता दें। सैलरीड लोग दरें बढ़ने पर एक एक्स्ट्रा EMI का प्री-पेमेंट कर सकते हैं। वहीं, स्वरोजगार (self-employed) वाले लोग फीस का हिसाब-किताब लगाकर पुराने लोन को रेपो-लिंक्ड लोन में शिफ्ट कर सकते हैं।