RBI MPC Meet 2024: 'RBI ने रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा' ये लाइन सुनने के बाद बिजनेस एक्सपर्ट को यह जरूर समझ में आ जाएगा कि आखिर ये किस तरह आम जनता की जेब पर असर डालेगा। वहीं, अगर हम आपसे पूछे कि क्या आप ये बता सकते हैं कि इस लाइन में लिखे हुए शब्द 'रेपो रेट' का क्या मतलब है? अगर नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्या होता है। ये दोनों ही आपकी जेब को कैसे प्रभावित करते हैं।
आखिर क्या है रेपो रेट?
जिस तरह हमारे देश की कमान प्रधानमंत्री के हाथों में होती है ठीक उसी तरह सभी बैंकों की देखरेख और उनके लिए अलग-अलग पॉलिसी को निर्धारित करने का फैसला आरबीआई का होता है। आरबीआई एमपीसी मीटिंग में लोगों की नजर रेपो रेट पर रहती है। रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर आरबीआई कमर्शियल बैकों को लोन देता है। जब रेपो रेट बढ़ती है, तो बैकों को आरबीआई से मिलने वाला लोन महंगा हो जाता है।
रेपो रेट से आपकी जेब पर ऐसे पड़ता है असर
कॉमर्शियल बैंक रेपो रेट का बोझ ग्राहकों पर डालते हैं। वे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे सभी लोन्स पर ब्याज दरों को बढ़ा देते हैं। रेपो रेट में बढ़ोतरी या फिर कटौती का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है।
जानिए क्या है रिवर्स रेपो रेट और इससे आपकी जेब पर इस तरह पड़ता है असर
जब बैंक अपने पैसे को आरबीआई के पास देता है तो आरबीआई में जमा पैसे जो ब्याज दर लगती है वह रिवर्स रेप रेट होता है। अब आप सोच रहे होंगे कि अगर रिवर्स रेपो रेट ज्यादा हो तो बेहतर है क्योंकि इससे बैंक को अधिक ब्याज मिलेगा और वह आपको अधिक पैसा देगा, लेकिन असल में ऐसा नहीं है।
अगर रिवर्स रेपो रेट अधिक होगा तो बैंक लालच में आकर अधिक ब्याज कमाने के चक्कर में आरबीआई में ज्यादा पैसा जमा करने लगेंगे। ऐसे में बैंक आरबीआई को अधिक पैसे देगा और आपको कम देगा। इससे आपकी जेब को नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए जरूरी ये है कि रिवर्स रेपो रेट एक बैंलेंस में रहे।
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