भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में ₹2.11 लाख करोड़ के रिकॉर्ड डिविडेंड का ऐलान किया है। सरकार के लिए यह किसी बड़ी लॉटरी से कम नहीं है, जिससे इस वित्त वर्ष में उसकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होगी। इससे न केवल राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि मार्केट में नकदी का प्रवाह (liquidity) भी बढ़ेगा। आम निवेशकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि इससे आने वाले समय में ब्याज दरों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

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जब राजकोषीय घाटा कम होता है, तो सरकार को बाजार से कम कर्ज लेना पड़ता है। सरकारी उधारी कम होने पर आमतौर पर बॉन्ड यील्ड (bond yields) में गिरावट आती है। इस बदलाव का सीधा असर आपके डेट इन्वेस्टमेंट (debt-oriented investments) से मिलने वाले रिटर्न पर पड़ता है। अगर आप इस समय फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को बेहतर तरीके से मैनेज करना चाहते हैं, तो इन बारीकियों को समझना आपके लिए बहुत जरूरी है।

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FD रेट्स और बॉन्ड यील्ड पर RBI डिविडेंड का क्या होगा असर?

बॉन्ड यील्ड में गिरावट का मतलब है कि FD की ब्याज दरें अब अपने उच्चतम स्तर (peak) पर पहुंच चुकी हैं। मुमकिन है कि बैंक जल्द ही नई जमा राशियों पर ब्याज दरों में कटौती शुरू कर दें। ऐसे में निवेशकों के लिए समझदारी इसी में है कि वे 'FD लैडरिंग' के जरिए मौजूदा ऊंची दरों को लॉक कर लें। यह स्ट्रैटेजी आपको तब भी स्थिर कमाई देगी, जब ब्याज दरों का चक्र नीचे की ओर मुड़ने लगेगा।

इन्वेस्टमेंट का प्रकार5 साल का रिटर्न10 साल का रिटर्न15 साल का रिटर्न
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)7.0%7.2%7.5%
डेट फंड्स7.5%7.8%8.0%
इक्विटी SIP12.0%13.5%15.0%

RBI डिविडेंड के बाद कैसे मैनेज करें अपनी SIP और डेट फंड्स?

डेट फंड निवेशकों के लिए गिरती यील्ड के बीच टारगेट मैच्योरिटी फंड्स (TMFs) एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। जब बाजार में ब्याज दरें गिरती हैं, तो इन फंड्स को कैपिटल गेन्स का फायदा मिलता है। वहीं, शेयर बाजार में निवेश के लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) अभी भी सबसे बेहतरीन रास्ता है। चूंकि अभी मार्केट वैल्यूएशन काफी ज्यादा है, इसलिए इक्विटी में एकमुश्त (lumpsum) बड़ी रकम लगाने से फिलहाल बचना चाहिए।

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इन निवेशों से होने वाले मुनाफे पर टैक्स के नियम इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपने पैसा कितने समय तक निवेशित रखा है। डेट फंड से होने वाली कमाई पर अब आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है और इसमें इंडेक्सेशन का लाभ भी नहीं मिलता। अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को बेहतर बनाने के लिए टैक्स एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। बदलते माहौल में अपनी SIP को अनुशासन के साथ जारी रखना ही मुनाफे का सौदा होगा।