नयी दिल्ली। अगर आप घर खरीदना चाहते हैं तो पहले ये तय करें कि तैयार फ्लैट में जाना सही होगा या निर्माणाधीन प्रॉपर्टी में खरीदारी करना। इन दोनों में से चुना गया कोई एक ऑप्शन मुख्य रूप से आपके फाइनेंस और जरूरत पर निर्भर करेगा। दोनों तरह की प्रॉपर्टी के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। इसलिए ये फैसला आपको बहुत सोच समझ कर करना होगा। इसीलिए हम कुछ ऐसे पॉइंट्स लेकर आए हैं, जिन पर आपको प्रॉपर्टी खरीदने से पहले विचार करना चाहिए। किसी के भी जीवन में सबसे बड़ा जरूरी खर्च घर खरीदना ही होता है। इसलिए हर छोटी से छोटी बात पर ध्यान देना जरूरी है।
क्या आपके पास एक बड़ा सेविंग फंड है, जिसे आप घर खरीदने के लिए निवेश करने को तैयार हैं? यदि आपका उत्तर हाँ है तो फिर तैयार संपत्ति (रेडी टू मूव इन) का विकल्प चुनें। दूसरी तरफ यदि आपको एक अच्छी लोकेशन और एक अच्छा घर मिल गया है, लेकिन आपको फाइनेंस की कमी के कारण साल-दो-साल और तैयारी करनी होगी तो फिर निर्माणाधीन यानी अभी बन रही प्रॉपर्टी चुनें। डाउन पेमेंट अदा करने के लिए लोन सुरक्षित करें और बचत के लिए कुछ साल रखें, जिससे आप आर्थिक दबाव झेल सकेंगे। तब तक आपकी प्रॉपर्टी तैयार हो जाएगी और ईएमआई शुरू हो जाएगी।
यदि आप किराए के अपार्टमेंट में रहते हैं और खरीदने के लिए संपत्ति की तलाश कर रहे हैं, तो एक तैयार घर सही रहेगा। क्योंकि इससे आपको किराया बचाने में मदद मिलेगी। मगर एक दम बड़ा खर्च आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। इसलिए आराम से अपनी आने वाली जरूरतों का आकलन जरूर करें। जैसे कि यदि कुछ सालों में आपके सामने कोई और बड़ा काम है तो उसके लिए प्लानिंग करके चलें।
यदि आप ऐसी जगह घर खरीद रहे हैं जहां अन्य जरूरतें डेवलप हैं तो ये समझदारी भरा कदम होगा। बाकी जरूरतों से हमारा मतलब है दुकानें, मार्केट, मॉल, स्कूल और कॉलेज आदि। मगर यदि आप ऐसी जगह शिफ्ट होने की सोच रहे हैं जहां फैसिलिटीज खराब हालत में हैं या अभी वहां ऐसे प्रोजेक्ट शुरू नहीं है तो आप मुसीबत में पड़ जाएंगे। ऐसी जगह घर न खरीदना ही बेहतर है।
आयकर अधिनियम की धारा 24 और धारा 80 सी के तहत जब आप रेडी-टू-मूव हाउस खरीदते हैं, तो आपको 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। होम लोन पर ब्याज के भुगतान सहित ये छूट 2 लाख रु हो जाती है।
अब दिल्ली में घर खरीदना आसान हो गया है। असल में दिल्ली सहकारी आवास वित्त निगम लिमिटेड (डीसीएचएफसीएल) ने होम लोन की ब्याज दर को 7.45 प्रतिशत से घटा कर 6.75 प्रतिशत कर दी है। दिल्ली सरकार द्वारा प्रॉपर्टी पर सर्किल रेट में 20 फीसदी की कटौती किए जाने के कुछ दिनों बाद अब ब्याज दरों में कमी लाने का फैसला किया गया। ये ऐलान पिछले महीने ही किया गया है।
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