नयी दिल्ली। पब्लिक प्रॉविडेंट फंड या पीपीएफ भारत में एक पसंदीदा निवेश ऑप्शन है, जिससे आप लंबी अवधि में मोटा फंड बना सकते हैं। पीपीएफ में निवेश पर कोई जोखिम भी नहीं है। जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए ये एक बढ़िया ऑप्शन है। यहां टैक्स बेनेफिट भी मिलता है। आप जो पैसा निवेश करेंगे, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि सब कुछ टैक्स फ्री रहेगी। लेकिन इन लाभों के बावजूद पीपीएप सभी के लिए एक अच्छा निवेश विकल्प नहीं है। पीपीएफ की अपनी कुछ सीमाएँ हैं। यदि आप पीपीएफ में निवेश करने की सोच रहे हैं तो आपको इसके नुकसानों के बारे में भी पता होना चाहिए।

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ब्याज दर है कम

इस समय पीपीएफ पर 7.1 फीसदी ब्याज दर मिल रहा है। मौजूदा एफडी रेट के मुकाबले ये आपको अच्छी लग सकती है। मगर पहले पीपीएफ पर 12 फीसदी ब्याज मिलता था। उसके मुकाबले मौजूदा ब्याज दर काफी कम है। दूसरी बात अब म्यूचुअल फंड जैसे ऑप्शन मौजूद हैं, जिनमें आप कम जोखिम के साथ अच्छा रिटर्न पा सकते हैं। म्यूचुअल फंड स्कीमें 30-40 फीसदी तक रिटर्न दे सकते हैं।

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लिक्विडिटी की है दिक्कत

पीपीएफ आपकी लिक्विडिटी (जरूरत के समय तुरंत पैसा मिलना) समस्या को दूर नहीं करता, क्योंकि पीपीएफ अकाउंट में आपका पैसा 15 वर्षों में मैच्योर होता है। हालांकि आप समय से पहले पैसा निकाल सकते हैं। मगर ये म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार जैसे ऑप्शन में आप जब मर्जी चाहे पैसा निकाल सकते हैं। म्यूचुअल फंड आपको लिक्विडिटी का ऑप्शन देता है।

अधिकतम निवेश पर लिमिट

पीपीएफ में अधिकतम निवेश पर लिमिट है। जो लोग लंबी अवधि में एक बड़ा फंड जमा करना चाहते हैं, पीपीएफ उनके लिए इतना अच्छी नहीं है। क्योंकि आप पीपीएफ में किसी वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं। जबकि ईएलएसएस जैसे विकल्प में अधिकतम निवेश पर कोई लिमिट नहीं है। यहां भी आपको 1.5 लाख रु तक टैक्स बेनेफिट मिलेगा।

जॉइंट अकाउंट की सुविधा नहीं

एफडी और म्यूचुअल फंड के उलट पीपीएफ खाते को आप संयुक्त रूप से नहीं खोला जा सकता है। इस कमी के कारण ये फैमिली सेविंग्स के लिए अच्छा उपकरण नहीं बनता। पीपीएफ खाता आप या आपके पति या पत्नी द्वारा खोला जा सकता है, लेकिन जॉइंट नहीं। किसी नाबालिग के नाम पर आप पीपीएफ खाता खोल सकते हैं।

ईपीएफ के साथ पीपीएफ

यदि आप पहले से ही ईपीएफओ सदस्य हैं और ईपीएफ में योगदान दे रहे हैं तो पीपीएफ से आपका टैक्स बेनेफिट सीमित हो जाएगा। इसके अलावा ईपीएफ पर ब्याज दर अधिक है, जबकि पीपीएफ पर कम। आप वीपीएफ के जरिए ही ईपीएफ में अपना योगदान बढ़ा सकते हैं और ऊंची ब्याज दर का फायदा ले सकते हैं। मगर ध्यान रहे कि यदि आपका ईपीएफ में 2.5 लाख रु से अधिक योगदान हुआ तो उस पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगेगा। सरकार ने ये नियम बजट 2021 में पेश किया है। वैसे पीपीएफ का एक फायदा और है। आप पीपीएफ जमा पर लोन भी ले सकते हैं। इस पर ब्याज देना भी कम देना होगा।