नई दिल्ली, जुलाई 25। निवेश, मिलने वाले ब्याज और मैच्योरिटी पर टैक्स बेनेफिट पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) को एक पसंदीदा टैक्स सेविंग निवेश ऑप्शन बनाता है। इसके अलावा सरकार पीपीएफ पर सरकारी सॉवरेन गारंटी के अलावा आपको मौजूदा एफडी दरों से अधिक ब्याज दर मिलता है। पीपीएफ इनकम टैक्स के तहत ईईई (छूट, छूट, छूट) कैटेगरी के अंतर्गत आता है, लेकिन टैक्ससेविंग निवेश ऑप्शनों में इसकी सबसे लंबी लॉक-इन अवधि है। पीपीएफ में लॉक-इन अवधि 15 साल है, मगर कुछ साल बाद ही आप इस पर लोन ले सकते हैं और आंशिक निकासी भी कर सकते हैं। पीपीएफ खाता खुलने के 3 साल बाद लोन और 6 साल बाद आंशिक निकासी की सुविधा उपलब्ध है। यहां हम आपको बताएंगे कि पीपीएफ खाताधारक की मृत्यु के मामले में उसके नॉमिनी को कितने समय में पैसा मिलेगा।
15 साल की शुरुआती निवेश अवधि के बाद, पीपीएफ निवेशकों के पास खाते की अवधि को बिना किसी लिमिट के 5 साल के स्लैब में आगे बढ़ाने का विकल्प होता है। निवेशक बिना किसी अतिरिक्त निवेश के भी अवधि बढ़ा सकते हैं। यदि आप पीपीएफ खाते की अवधि बढ़ाते हैं तो बढ़ी हुई अवधि भी लॉक-इन अवधि होगी। हालांकि, बिना किसी योगदान के विस्तार के मामले में, कोई लॉक-इन अवधि नहीं होगी।
पीपीएफ खाताधारक की मृत्यु के बाद, नॉमिनी व्यक्ति बाकी अवधि के लिए पीपीएफ खाते में निवेश जारी रखने के पात्र नहीं है। हां बैलेंस का दावा फॉर्म जी दाखिल करके किया जा सकता है। यदि कोई नॉमिनी नहीं है, तो कानूनी उत्तराधिकारी बैलेंस का दावा कर सकता है। 1,00,000 रु से कम बैलेंस के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई निवेशक पीपीएफ खाता खोलने और उसमें योगदान करने के बाद पांच साल के भीतर मर जाता है, तो नॉमिनी व्यक्ति को दस साल तक इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। फॉर्म जी जमा करने और संबंधित कार्यालयों की तरफ से वेरिफाई किये जाने के बाद बैलेंस राशि नॉमिनी व्यक्ति को भेज दी जाएगी। ब्याज उस पिछले महीने तक जारी रहेगा जिसमें नॉमिनी व्यक्ति को बैलेंस राशि का भुगतान किया जाएगा। ध्यान रहे कि नॉमिनी व्यक्ति पीपीएफ खाते में योगदान नहीं कर सकता। पीपीएफ में फिलहाल 7.1 फीसदी ब्याज दर ऑफर की जा रही है।
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