नई दिल्ली, जुलाई 5। पब्लिक प्रोविडेंट फंड या पीपीएफ जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए लंबी अवधि में एक बड़ा फंड बनाने के लिए पसंदीदा ऑप्शन है। इसमें निवेशकों को एक निश्चित ब्याज दर मिलती है और उनका पैसा पूरी तरह सेफ रहता है। पीपीएफ ईईई या 'एग्जेम्प्ट एग्जेम्प्ट एग्जेम्प्ट' कैटेगरी के अंतर्गत आता है। इसका मतलब है कि आप पीपीएफ में जो पैसा निवेश करते हैं, वार्षिक ब्याज और मैच्योरिटी सभी को टैक्स से छूट मिलती है। लेकिन इन फायदों के बावजूद पीपीएफ सभी के लिए बेस्ट निवेश ऑप्शन नहीं है, क्योंकि इसकी अपनी सीमाएं भी हैं। आपको पीपीएफ में निवेश के नुकसानों के बारे में भी पता होना चाहिए।
सरकार ने बीते सालों में पीपीएफ की ब्याज दर घटाई है। एफडी के मुकाबले आपको यह एक आकर्षक रिटर्न लग सकता है, मगर जानकारों का कहना है कि मौजूदा आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, पीपीएफ पर मिलने वाली ब्याज दर खास नहीं है। एक समय पीपीएफ 12 फीसदी तक का रिटर्न देता था। अगर आप इतना रिटर्न चाहते हैं तो आपको म्यूचुअल फंड जैसे किसी दूसरे ऑप्शन की तरफ देखना होगा।
पीपीएफ खाते में लिक्विडिटी की समस्या रहती है। ये लिक्विडिटी की समस्या के मुद्दे को दूर करने में विफल है, क्योंकि इस ऑप्शन में आपका निवेश खाता 15 साल बाद मैच्योर होता है। हालांकि आप कुछ साल बाद आंशिक निकासी कर सकते हैं, मगर फिर भी आपको शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड जैसी लिक्विडिटी की सुविधा पीपीएफ में नहीं मिलेगी।
जो लोग लंबी अवधि में बड़ा फंड जमा करना चाहते हैं, उनके लिए पीपीएफ उपयुक्त नहीं है। क्योंकि आप किसी वित्तीय वर्ष में पीपीएफ में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं। जबकि ईएलएसएस में, जो हाई रिटर्न के साथ धारा 80 सी के तहत टैक्स बेनेफिट ऑफर करता है, में अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। मगर वहां भी आपको टैक्स बेनेफिट केवल 1.5 लाख रुपये तक पर उपलब्ध होगा।
अगर आप ईपीएफओ के सदस्य हैं और वहां लगातार पैसा जमा कर रहे हैं तो पीपीएफ से मिलने वाले टैक्स बेनिफिट सीमित रहेंगे। दूसरी बात आप वीपीएफ का सहारा लेकर ईपीएफ में ही ज्यादा निवेश कर सकते हैं। वीपीएफ पर वही ब्याज दर होती है, जो ईपीएफ पर और इस समय पीपीएफ के मुकाबल ईपीएफ पर ब्याज दर अधिक है। तो ईपीएफ सदस्यों के लिए पीपीएफ फायदेमंद नहीं है।
पीपीएफ में एफडी और म्यूचुअल फंड के उलट जॉइंट अकाउंट नहीं खोला जा सकता। इससे ये एक अच्छा फैमिली सेविंग्स ऑप्शन साबित नहीं होता। हालांकि कोई नाबालिग के नाम पर पीपीएफ खाता खोल सकता है। बता दें कि राष्ट्रीय बचत संगठन द्वारा 1968 में शुरू की गई पीपीएफ योजना का उद्देश्य छोटी बचत को एक आकर्षक निवेश ऑप्शन बनाना था। वैसे अगर आप अपना कार्यकाल समझदारी से चुनते हैं, तो लंबी अवधि में पीपीएफ बहुत अच्छा रिटर्न देगा और आप इससे एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं।
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