Mutual Fund : शेयर बाजार के लिए सटीक अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। इसलिए, बहुत से लोग बैंक एफडी और म्यूचुअल फंड हाउसों की स्कीमों में एसआईपी के जरिए निवेश करने का ऑप्शन चुनते हैं, क्योंकि यह लंबी अवधि में पैसा बनाने का एक शानदार और आसान तरीका है। अपने लिए सही निवेश स्कीम चुनना यह तय करने के लिए पहला कदम है कि आखिर में आपको अच्छा रिटर्न मिलेगा या नहीं। हालांकि, यह जानना भी जरूरी है कि म्यूचुअल फंड से कब बाहर निकलना चाहिए। आपको ये बात निवेश शुरू करने से पहले पता होना चाहिए ताकि आप सही समय पर पैसा निकाल सकें। अधिक लंबी अवधि तक म्यूचुअल फंड में निवेश बरकरार रखने से आपको मैच्योरिटी पर अच्छा रिटर्न मिलेगा, लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं, जहां आपको मैच्योरिटी से पहले बाहर निकलना पड़ सकता है।
आगे हम आपको कुछ मौकों की जानकारी देंगे, जब आपके लिए म्यूचुअल फंड से बाहर निकलना एक जरूरी कदम हो जाता है। ध्यान रहे कि हर निवेशक के लिए अपने निवेश पर नज़र रखना और म्यूचुअल फंड से बाहर निकलने का समय आने पर तेजी से सही फैसला लेना बहुत जरूरी है।
अगर फंड खराब प्रदर्शन करे
यदि आपने जिस म्यूचुअल फंड में निवेश किया हुआ है वो लगातार 3-4 तिमाहियों तक खराब प्रदर्शन करे, तो आपको उस स्कीम से बाहर निकल जाना चाहिए। आपको उस समय नुकसान तो होगा, मगर आप ज्यादा नुकसान से बच सकते हैं।
आपको यह भी पता होना चाहिए कि कब आपको अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना है। रीबैलेंस करने के दौरान आपको कुछ फंड्स से बाहर निकलना होगा। यानी रीबैलेंस का समय एक और मौका है, जब आपको किसी म्यूचुअल फंड स्कीम से बाहर निकलना होगा।
म्यूचुअल फंड सहित किसी भी निवेश ऑप्शन में पैसा लगाने से पहले आपको अपना टार्गेट सेट कर लेना चाहिए। आपका लक्ष्य तय होना चाहिए कि आप किसी ऑप्शन में क्यों निवेश कर रहे हैं। उस टार्गेट को सेट करने के कई फायदे हैं। इनमें एक है कि जब आपको टार्गेट क्लियर होता है तो आपको पता रहता है कि किसी स्कीम में रुकने का फायदा है या नहीं। इसलिए जैसे ही आपका टार्गेट पूरा हो जाए आपको चाहिए कि आप उस स्कीम में रुक कर और जोखिम न लें, बल्कि फौरन अपना पैसा निकाल लें और अपने उद्देश्य के लिए उसे खर्च करें।
किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम के एक या उससे अधिक मैनेजर तय होते हैं। समय-समय पर इनमें बदलाव भी होता है। यदि आपने जिस स्कीम में पैसा लगाया हुआ है उसके मैनेजर बदलते हैं तो आप स्कीम से बाहर निकलने के बारे में सोच सकते हैं। परंतु ऐसा केवल तब करें जब आप फंड मैनेजर के फैसले से सहमत न हों। पर यदि आपको मार्केट की जानकारी बहुत कम है तो फिर मैनेजर पर भरोसा करना सही हो सकता है। बाकी निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने में आप अपने वित्तीय सलाहकार की मदद ले सकते हैं।
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