नई दिल्ली, सितंबर 20। नए निवेशकों के लिए शेयर बाजार डायरेक्ट निवेश करना हानिकारक हो सकता है। क्योंकि लोगों के पास अकसर कम जानकारी होती है और गलत कंपनी में पैसा लगा सकते हैं, जिससे उनकी निवेश राशि डूब सकती है। इसके लिए बेहतर है कि आप डायरेक्ट शेयर बाजार में निवेश न करके दूसरा रूट अपनाएं। जानकर सलाह देते हैं कि नये निवेशकों को म्यूचुअल फंड में शुरुआत करनी चाहिए। इसके लिए वे एसआईपी की मदद ले सकते हैं। पर आपको कभी एसआईपी रोकनी नहीं चाहिए।
किसी भी नये निवेशक को म्चूयुअल फंड में एसआईपी के जरिए अपनी निवेश यात्रा शुरू करनी चाहिए। आपकी बेसिक जानकारी के लिए बता दें कि एसआईपी एक खास फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है। इसके जरिए आप आसानी से लंबी अवधि में थोड़ा थोड़ा पैसा हर महीने जमा करके एक बड़ा फंड बना सकते हैं। पर बाजार में गिरावट पर कई निवेशक एसआईपी रोक देते हैं। पर ये गलत तरीका है। असल में में वे गिरावट पर निवेश रोक कर एक बड़ा मौका गंवा देते हैं।
निवेश से लाभ उठाने के लिए अनुशासन जरूरी होता है। बिना अनुशासन के आप कितनी ही अच्छी म्यूचुअल फंड स्कीम को चुन लें उससे फायदा नहीं उठा पाएंगे। अब समझिए गिरावट पर एसआईपी का क्या फाय है। बाजार में तेजी पर हर निवेशक को लगता है सब बढ़िया चल रहा है। पर गिरावट पर वे घबरा जाते हैं। पर वे ये नहीं जानते हैं कि इससे उनका अनुशासन टूट जाएगा।
शेयर बाजार में गिरावट पर आपको एसआईपी क्यों जारी रखनी चाहिए इसे एक उदाहरण से समझें। मान लीजिए कि आप किसी ऐसे फंड में जनवरी 2018 से अगस्त 2021 तक लगातार 2500 रुपये की मासिक एसआईपी करते, जिसने 18.25 फीसदी रिटर्न दिया होता तो आपने अब तक 1.10 लाख रुपये का निवेश किया होता। पर यह रकम 1.52 लाख रु हो जाती। ये रकम निवेश पर मिले रिटर्न के कारण बढ़ी।
बाजार में गिरावट के दौरान यदि किसी ने अप्रैल 2020 से सितंबर 2020 तक एसआईपी बंद कर दी होती, तो उसने अब तक 95 हजार रुपये का निवेश किया होता। रिटर्न के साथ यह रकम 1.26 लाख रुपये होती। यहां रिटर्न कम हो गया। रिटर्न रहता 15.98 प्रतिशत।
असल में होता यह है जब शेयर बाजार गिरता है तो आप एसआईपी से अधिक म्यूचुअल फंड यूनिट्स खरीद सकते हैं। यानी आपको उस समय ये सस्ते में मिलेगी। यही वो पॉइंट है जो अकसर लोग मिस कर देते हैं। वहीं टैक्स बेनेफिट के लिए ईएलएसएस स्कीम बेहतर है। ये एक ऐसी म्यूचुअल फंड योजना है जो धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स बेनेफिट के साथ आती है और इसमें तीन साल की सबसे कम लॉक-इन अवधि होती है। ईएलएसएस में निवेश की गई राशि डिडक्शन के योग्य होती है और इस प्रकार निवेशक के टैक्स स्लैब के आधार पर उसकी टैक्स देनदारी कम हो जाती है। ईएलएसएस मुख्य रूप से एक इक्विटी फंड होता है जिसमें कम से कम 80 फीसदी पैसा इक्विटी में निवेश किया जाता है।
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