नई दिल्ली, मई 17। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने शेयर बाजार में स्टॉक एक्सचेंजों पर उम्मीद से कम रेट शुरुआत की। इसका शेयर छूट के साथ लिस्ट हुआ। इससे आईपीओ निवेशकों की सभी कैटेगरियों को नुकसान पहुंचा। एलआईसी के शेयर बीएसई पर 9 फीसदी की छूट के साथ 867.20 रुपये पर लिस्ट हुए। पर उसके बाद शेयर में थोड़ी तेजी आई और फिलहाल यह 881.20 रु पर है। मगर आईपीओ निवेशक अभी भी नुकसान में हैं। आगे जानिए जिन लोगों को एलआईसी के आईपीओ में शेयर मिले हैं वो नुकसान होने के बाद अब क्या करें।
एलआईसी का लिस्टिंग प्राइस सभी कैटेगरियों के निवेशकों के लिए नुकसान वाला रहा। इनमें पॉलिसीधारक भी शामिल रहे, जिन्हें 60 रुपये प्रति शेयर की छूट के बाद 889 रुपये के रेट पर शेयर दिए गए थे, जबकि कर्मचारियों और खुदरा निवेशकों को 904 रुपये के रेट शेयर आवंटित किए गए थे। हालांकि, शुरुआती घंटों के दौरान 900 रुपये के स्तर से नीचे कारोबार करने के बाद शेयर ने बीएसई पर 920 रुपये का स्तर भी छुआ।
खराब लिस्टिंग के बावजूद, अधिकांश बाजार जानकार एलआईसी के शेयर पर सकारात्मक हैं और निवेशकों को लंबी अवधि के लिए शेयर रखने का सुझाव दिया है। एक जानकार के अनुसार मौजूदा बाजार की स्थितियों के कारण एलआईसी के शेयर भारी छूट पर लिस्ट हुए हैं, जो बीमा कंपनी के अनुकूल नहीं है। यानी इसका कंपनी की खराबी नहीं है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जानकार के मुताबिक यह उन निवेशकों के लिए एक अच्छा मौका है जो एलाआईसी के शेयर में नए सिरे से एंट्री करना चाहते हैं या अधिक शेयर खरीदना चाहते हैं। पर ऐसा करने के लिए आपके पास निवेश को बरकरार रखने का एक वर्ष से अधिक का समय होना चाहिए। एलआईसी में लंबी अवधि के दौरान पैसा बनाने वाला शेयर बनने की संभावना है।
एलआईसी भारत में सबसे बड़ी बीमा प्रदाता कंपनी है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी नए बिजनेस प्रीमियम में 66 प्रतिशत से अधिक है। कंपनी पार्टिसिपेटिंग बीमा प्रोडक्ट और पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट की पेशकश करती है। एलआईसी 2,048 शाखाओं, 113 मंडल कार्यालयों और 1,554 सैटेलाइट कार्यालयों के माध्यम से कारोबार चलाती है। यह फिजी, मॉरीशस, बांग्लादेश, नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर, कुवैत और यूनाइटेड किंगडम में विश्व स्तर पर कारोबार करती है।
बीमा कंपनी के कर्मचारियों और पॉलिसीधारकों की मजबूत मांग के कारण इश्यू को 2.95 गुना आवेदन मिले। हालांकि, खुदरा विक्रेताओं, क्यूआईबी और एचएनआई निवेशकों ने प्रमुख रूप से बहुत अच्छा रेस्पोंस नहीं दिया। सेकेंडरी मार्केट में बेहद नकारात्मक धारणा के कारण ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयर के प्रीमियम में पिछले कुछ हफ्तों में तेजी से गिरावट आई है। एलआईसी घरेलू प्राथमिक बाजार में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ रहा। सरकार ने कंपनी में 22.13 करोड़ शेयर या 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची, जिसका मूल्य 6 लाख करोड़ रुपये था, जो 5.4 लाख करोड़ रुपये के एम्बेडेड मूल्य का लगभग 1.12 गुना था। पॉलिसीधारकों के लिए अलग रखे गए हिस्से को 6.11 गुना, कर्मचारियों के आवंटित कोटे को 4.39 गुना और खुदरा निवेशकों के आरक्षित शेयरों के लिए 1.99 गुना आवेदन मिले। वहीं योग्य संस्थागत खरीदारों के आरक्षित हिस्से को 2.83 गुना और गैर-संस्थागत निवेशकों के हिस्से को 2.91 गुना सब्सक्राइब किया गया।
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