Payment of Gratuity Act: आमतौर पर ग्रेच्युटी के रूप में मिलने वाली रकम तब मिलती है, जब कर्मचारी नौकरी छोड़ता है या उसे नौकरी से हटाया जाता है या फिर वो रिटायर होता है। कर्मचारी की मृत्यु होने या दुर्घटना की वजह से नौकरी छोड़ने की स्थिति में उसे या उसके नॉमिनी को ग्रेच्युटी की रकम दी जाती है।
अगर आप किसी कंपनी में 4 साल 240 दिन काम कर लेते हैं तो आप ग्रेच्युटी के हकदार हो जाते हैं यह जरूरी है कि कंपनी तय समय सीमा के बाद जॉब छोड़ने पर आपको ग्रेच्युटी दे। कई बार कंपनी या नियोक्ता नौकरी छोड़ने पर कर्मचारी को ग्रेच्युटी देने में आनाकानी करता है। आइए जानते हैं कि ऐसे में आप क्या कर सकते हैं।
समय सीमा के बाद भी नहीं मिला है ग्रेचुटी का पैसा तो करें ये काम
अगर कंपनी आपको निर्धारित समय के अंदर ग्रेच्युटी नहीं देती है तो सबसे पहले आप अपने नियोक्ता को लीगल नोटिस भेज सकते हैं। नोटिस के बाद भी नियोक्ता ग्रेच्युटी देने में नाकाम रहता है तो आप इसकी शिकायत कंट्रोलिंग अथॉरिटी से कर सकते हैं। आमतौर पर जिले के लेबर कमिश्नर ऑफिस में एक असिस्टेंट लेबर कमिश्नर कंट्रोलिंग अथॉरिटी होता है।
इस नियम के अंतर्गत आपको ग्रेच्युटी पाने का है पूरा हक
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने का हक देता है। यानि साफ है कि अगर आप ने नियम पूरे किए हैं तो आपको ग्रेच्युटी पाने से कोई रोक नहीं सकता। आपकी शिकायत पर कंपनी को भुगतान का निर्देश जारी किया जाएगा।
इस निर्देश जारी करने के 30 दिन के अंदर कंपनी को ग्रेच्युटी की रकम जारी करनी होगी। लेकिन मान लीजिए कि फिर भी कंपनी पैसा जारी नहीं करती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी। अगर कंपनी के खिलाफ शिकायत सही पाई जाती है तो कंपनी के जिम्मेदार शख्स को 6 महीने से 2 साल के लिए जेल हो सकती है।
कंपनी को दी जाएगी सजा
ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर विलंब अवधि का ब्याज भी चुकाने को कहा जाता है। इसके अलावा कई बार नियोक्ता पर जुर्माना भी लगाया जाता है। इसमें 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा का प्रावधान है।
अधिकांश मामलों में कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के बाद बिना किसी परेशानी के ये रकम उनके खातों में मिल जाती हैं लेकिन ऐसे भी मामले सामने आए हैं जहां कर्मचारियों को ग्रेच्युटी की रकम पाने के लिए कोशिशें करनी पड़ी हैं। ऐसे में आप इस तरीके को अपना सकते हैं।
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