नई दिल्ली। देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार बढ़ रहा है। इसमें सबसे ज्यादा अच्छी बात यह है कि विदेशी मुद्रा भंडार कोरोना काल में बढ़ रहा है। इसके दो कारणा हैं। पहला है कि देश में आयात घटा है, वहीं दूसरा कारण है कि रिलांयस के अलावा अन्य क्षेत्रों में काफी ज्यादा विदेशी निवेश आया है। यही कारण है कि 17 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार 1.27 अरब डॉलर बढ़कर 517.63 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गया।

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आरबीआई ने दी है जानकारी

रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा यानी विदेशी मुद्रा एसेट्स 1.24 अरब डॉलर बढ़कर 476.88 अरब डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा भंडार ने 5 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में पहली बार 5 खरब डॉलर के स्तर को पार किया था। इसके पहले यह 8 सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

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तेजी से बढ़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था

रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की विकास दर 9.5 प्रतिशत रह सकती है। फिच रेटिंग्स ने हालांकि कोरोना संकट के कारण चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 5 प्रतिशत सिकुड़ने का अनुमान जताया है। लेकिन फिच ने कहा कि कोरोना संकट के बाद देश की जीडीपी वृद्धि दर के वापस पटरी पर लौटने की उम्मीद है। इसके अगले साल 9.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने की उम्मीद है।

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एसएंडपी ने भारत पर जताया भरोसा

वहीं रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स यानी एसएंडपी ने भारत की सॉवरिन रेटिंग को बीबीबी माइनस पर बरकरार रखा है। एसएंडपी ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर विश्वास जताते हुए आउटलुक को स्थिर रखा है। स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फिलहाल ग्रोथ रेट पर दबाव है, लेकिन अगले साल 2021 से इसमें सुधार दिखने को मिलेगा। फिच ने कहा है कि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए विकास दर का 8.5 प्रतिशत रह सकती है।

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