नई दिल्ली। कोरोना महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के चलते बहुत से लोगों की नौकरी चली गई है। ऐसे में यह लोग तेजी से नौकरी खोजने का काम कर रहे हैं। लेकिन यहां पर सावधानी की जरूरत है। ऐसे परेशान लोगों को ठगने के लिए बाजार में पूरा तंत्र खड़ा हो गया है। यह कई तरह से इन बेरोजगारों को ठगने की कोशिश कर रहा है, और कई बार सफल भी जाता है। इसलिए जरूरी है कि ऑनलाइन नौकरी की तलाश से पहले यह जान लें कि यहां पर नौकरी मिलने की प्रक्रिया क्या और कैसे गलत ऑफर करने वालों को पकड़ें।
हालांकि जालसाज काफी चालाकी से अपना जाल बुनते हैं, लेकिन अगर आप थोड़ा सतर्क रहें तो इनके झांसे से बचना काफी आसान है। एक बार लुटने के बाद ऐसे जालसाजों से पैसों की भरपाई काफी कठिन होती है। एडवोकेट सैफ मलिक के अनुसार ऐसे में सबसे अच्छा तरीका है कि सतर्क रहा जाए। एडवोकेट सैफ मलिक के अनुसार कुछ बातों का ध्यान रख कर इससे बचा जा सकता है।
ऐसे जालसाज ऑनलाइन जॉब पोर्टल से शिकार खोजने का काम करते हैं। आमतौर पर इनका तरीका इस प्रकार होता है
-जॉब रिक्रूटमेंट साइट से नौकरी तलाशने वाले की प्रोफाइल निकाल लेते हैं
-जो शिकार बन सकते हैं, उन सभी को बल्क में मेल भेजा जाता है
-फ्रॉड करने वाले खुद को जॉब कंसल्टेंट के तौर पर पेश करते हैं
-ये लोग अपनी फर्जी वेबसाइट, अस्थायी दफ्तर दिखाते हैं
-लोगों से वॉलेट या बैंक ट्रांसफर के जरिये रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने के लिए कहते हैं
-ऑनलाइन या टेलीफोन से इंटरव्यू कर लेते हैं
-बाद में फर्जी अप्वाइंटमेंट लेटर जारी कर देते हैं
-टियर 2 या टियर 3 शहरों के युवा
-कम लोकप्रिय कॉलेज या संस्थानों के ग्रेजुएट
-खराब कम्युनिकेशन स्किल वाले युवा
-5 साल तक के कार्य अनुभव वाले
-20 से लेकर 25 साल की उम्र वाले
-अंग्रेजी लिखने और बोलने में कमजोर लोग
-कम कुशल
यह जालसाल आमतौर पर लोगों को शिकार बनाने के लिए इस तरह से फंसाते हैं
ई-मेल है फंसाने का सबसे आसान तरीका
नौकरी देने का रैकेट चलाने वालों के लिए यह सबसे आसान तरीका है। यह लोग खुद को फ्रीलांस जॉब कंसल्टेंट के रूप में पेश कर ये नौकरी देने वाली बेवसाइटों से लोगों की प्रोफाइल तक पहुंच हासिल कर लेते हैं। इसके बाद यह लोग बल्क में मेल भेज देते हैं। अगर ये 5 फीसदी लोगों को भी अपना शिकार बनाने में सफल होते हैं, तो ठीकठाक पैसा बना लेते हैं।
यह जालसाज सरकारी विभागों की डुप्लीकेट या बिल्कुल ही अनजान कंपनी की वेबसाइट तैयार कर लेते हैं। बेवसाइट बनाने के बाद फिर यह ठग इस पर फर्जी नौकरी पोस्ट करते हैं। आवेदन करने वालों के टेस्ट लिए जाते हैं। रिजल्ट अपलोड किया जाता है। इसी बीच उनसे तरह-तरह की फीस वसूली जाती है। जब तक लोग समझ पाते हैं, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
कुछ जालसाल छोटे शहरों में जॉब कंसल्टेंट बनकर सीधे कॉलेज या इंस्टीट्यूट के चेयरमैन से संपर्क करते हैं। वे टॉप कंपनियों में प्लेसमेंट कराने का वादा करते हैं। इसके बदले एकमुश्त बड़ी रकम वसूल लेते हैं। बाद में इंटरव्यू से पहले ही ये चंपत हो जाते हैं।
एक तरफ जहां ठग रोज नए नए तरीके निकालते हैं, वहीं हमें थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। अगर आप सावधन रहेंगे तो इन ठगों के चंगुल में नहीं फंसेंगे। इसके लिए कुछ टिप्स अपनाए जा सकते हैं।
केवल विश्वसनीय वेबसाइटों पर जाएं : ज्यादातर कंपनियां अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नौकरियां पोस्ट करती हैं। इस तरह संदेहास्पद मेल की जगह कंपनी के करियर पेज पर जाएं। साइट पर सीधे अप्लाई करें।
जॉब पोर्टल पर सीवी पोस्ट करते हुए सुनिश्चित कर लें कि उस पर वह पोस्ट लिखी गई हो, जिसके लिए आवेदन कर रहे हैं। इसके रेस्पॉन्स में जो भी मेल मिलेगी, उसमें इस पोस्ट का जिक्र होगा।
नौकरी तलाशने वालों से कोई भी कंपनी किसी भी चरण में पैसे जमा करने के लिए नहीं कहती है। इसलिए सिक्योरिटी डिपॉजिट, रजिस्ट्रेशन या डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए फीस मांग रही कंपनी से तत्काल सावधान हो जाएं।
मेल के जरिये संपर्क करने वालों के इरादे पस्त करने का सबसे अच्छा तरीका उसे अच्छी तरह से पढ़ना है। तब सतर्क हो जाना चाहिए अगर इसमें ई-मेल एड्रेस नहीं है। लेटर की फॉर्मेटिंग, स्पेलिंग की गलतियां इत्यादि को भी देखें। अगर कुछ भी संदेह वाला लगे तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
ऑफर या एपॉइंटमेंट लेटर में कोई शक है तो कंपनी के पंजीकृत लैंडलाइन फोन नंबर पर कॉल करें। चेक करें कि जिस व्यक्ति ने मेल भेजा है, वह वास्तव में है कि नहीं।
अगर आपको 70 से 80 फीसदी का इंक्रीमेंट ऑफर किया जाता है या फिर मार्केट ट्रेंड के अनुरूप नहीं है तो जान लें कि यह निश्चित ही फेक जॉब ऑफर है। इसके अलावा एक दूसरा इंडिकेटर यह है कि आपको बगैर औपचारिक इंटरव्यू के ऑफर लेटर थमा दिया जाए। ऐसे में आपको सतर्क हो जाना चाहिए। एडवोकेट सैफ मलिक का कहना है कि अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे तो निश्चित रूप से ठगी का शिकार नहीं होंगे।
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