नई दिल्ली, फरवरी 23। इक्विटी-लिंक सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) सबसे लोकप्रिय टैक्स सेविंग निवेश विकल्पों में से एक है। अन्य पसंद की जाने वाली निवेश-सह-कर बचत (निवेश के साथ टैक्स बचत) योजनाएं पीपीएफ और एनपीएस हैं। हालांकि इन तीन निवेश विकल्पों में से, ईएलएसएस योजनाएं बेस्ट रिटर्न देती हैं। ईएलएसएस योजना आपको पीपीएफ और एनपीएस जैसे अन्य समान ही आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 सी के तहत कर बचत का लाभ दिलाती है। मगर इस पर आपको बाकी दोनों योजनाओं के मुकाबले उच्च रिटर्न और न्यूनतम लॉक-इन अवधि का फायदा मिलता है। ईएलएसएस योजनाएं डायवर्सिफाई म्यूचुअल फंड हैं, जो किसी वित्तीय वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती का फायदा दिलाते हैं। ईएलएसएस फंड 80% फंड इक्विटी में और बाकी डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। यहां हम आपको बताएंगे कि कैसे आप एक बेहतर ईएलएसएस स्कीम चुन सकते हैं।
निवेश पर रिटर्न को अलग अलग कैटेगरी के शेयरों में फैलाने के लिए निवेश का डायवर्सिफिकेशन जरूरी है। डायवर्सिफिकेशन का मतलब है अपने पोर्टफोलियो में अलग अलग शेयरों आदि को शामिल करना। ईएलएसएस फंड आमतौर पर 50-70 शेयरों में निवेश करता है। केवल दो ईएलएसएस योजनाएं डायर्सिफिकेशन को कवर करने के लिए पर्याप्त हैं। इसलिए एक ऐसी स्कीमें चुनें जो अलग अलग इक्विटी में निवेश करती हों।
इक्विटी शेयर लंबी अवधि में बेस्ट प्रदर्शन करते हैं, इसलिए विशेषज्ञ निवेशकों को 3 साल की शुरुआती लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद भी ईएलएसएस फंड में फिर से निवेश करने की सलाह देते हैं। जानकार मानते हैं 5-7 साल की निवेश अवधि जोखिम कम करने बढ़िया है। जब आप लंबे समय तक निवेश बरकरार रखते हैं तो आप एक पूरे बाजार साइकिल (लोअर और टॉप लेवल दोनों) देख पाएंगे, इसलिए आप आकर्षक रिटर्न कमा सकते हैं। ऐसे में किसी ईएलएलएल फंड को चुनने से पहले उसके पुराने रिटर्न को चेक करें।
पिछले रिटर्न के आधार पर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले ईएलएसएस फंडों में क्वांट टैक्स प्लान-ग्रोथ, मिराए एसेट टैक्स सेवर फंड - रेगुलर प्लान-ग्रोथ, बीओआई एक्सा टैक्स एडवांटेज फंड - रेगुलर प्लान-ग्रोथ, केनरा रोबेको इक्विटी टैक्स सेवर - रेगुलर प्लान-ग्रोथ और बीओआई एक्सा टैक्स एडवांटेज फंड शामिल हैं। आप इनमें से कोई फंड चुन सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी योजना को चुनने से पहले ऐतिहासिक प्रदर्शन एकमात्र तरीका नहीं होना चाहिए। असल में ईएलएसएस फंडों द्वारा अपनाई जाने वाली निवेश की रणनीति अलग हो सकती है। कुछ ईएलएसएस फंड लार्ज-कैप मे निवेश करते हैं तो वहीं कुछ मिड और/या स्मॉल-कैप में निवेश करते हैं। इसलिए और भी चीजें हैं, जो आपको देखनी होंगी। ज्यादा लार्ज कैप में निवेश करने वाली ईएलएसएस योजना में कम जोखिम होगा।
विशेषज्ञ बताते हैं किसी को, विशेष रूप से नए निवेशकों को, स्वयं निर्णय नहीं लेना चाहिए, क्योंकि नए निवेशक बेस्ट म्यूचुअल फंड को चुनने की समझ और जानकारी नहीं रखते। इसलिए बाजारों को मात देने के एक बढ़िया ट्रैक रिकॉर्ड वाले फाइनेंशियल प्लैनर या सलाहकार की मदद लेना बेहतर है। स्टॉक, पोर्टफोलियो, शेयरों की मार्केट और एक्सपेंस रेशियो जैसी चीजें जानकार ही अच्छे से हैंडल कर सकते हैं।
More Articles
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित
- ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान
- चेन्नई रेल अपडेट: आज रात कई ट्रेनें रद्द, सफर से पहले चेक करें अपना रूट और टाइमिंग