नई दिल्ली, जून 12। निवेश के कई सारे ऑप्शन इस समय मौजूद हैं। इनमें से एक है म्यूचुअल फंड। म्यूचुअल फंड में कई तरह की योजनाएं होती हैं। इनमें से दो प्रमुख है इक्विटी फंड और डेब्ट फंड। इनमें से इक्विटी फंड में आपको बेहतर रिटर्न मिल सकता है। मगर इनमें जोखिम होता है। डेब्ट फंड में रिटर्न कम होता है। मगर जोखिम नहीं होता। इसलिए यदि आप जोखिम भी नहीं चाहते और अधिक रिटर्न चाहते हैं तो हम आपको यहां कुछ निवेश ऑप्शन के बारे में बताएंगे।
फ्लोटिंग रेट फंड डेब्ट म्यूचुअल फंड स्कीम हैं, जो फ्लोटिंग रेट पर ब्याज देने वाले बॉन्ड में अपने निवेश का कम से कम 65 प्रतिशत निवेश करती हैं। इन बॉन्डों पर दी जाने वाली ब्याज दर एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ी होती है। ये बॉन्ड एक उचित बचाव की पेशकश करते हैं क्योंकि इनके कूपन समय-समय पर उच्च स्तर पर रीसेट हो जाते हैं। जब ब्याज दरें बढ़ रही होती हैं तो इन बॉन्डों की कूपन दर बढ़ जाती है। यदि आपके पास कम से कम तीन साल का नजरिया है, तो इनमें निवेश करने पर विचार करें।
शॉर्ट ड्यूरेशन फंड (एसडीएफ) डेब्ट म्यूचुअल फंड स्कीम हैं जो 1 से 3 साल की मैकॉले अवधि के बॉन्ड में निवेश करती हैं। मैकॉले ड्यूरेशन वह अवधि होती है, जिसमें निवेशक अपने निवेश किए गए पैसे को समय-समय पर ब्याज भुगतान और मूल भुगतान समेत से नगदी में प्राप्त करता है। इन फंड में जोखिम कम होता है और ये रिटर्न भी आम तौर पर बैंकों के फिक्स्ड डिपॉज़िट से अधिक देते हैं।
डेब्ट फंडों से अच्छे रिटर्न की तुलना के लिए निवेशकों को टारगेट मैच्योरिटी फंड में पैसा लगाना चाहिए। ये फंड पैसिवली मैनेज्ड डेब्ट म्यूचुअल फंड हैं जो निश्चित आय इंडेक्स पर नज़र रखते हैं। टीएमएफ की एक पहले से निर्धारित मैच्योरिटी तिथि होती है और ये उन डेब्ट सिक्योरिटीज को चुनते हैं करते हैं जो अंडरलाइंग इंडेक्स के कंपोनेंट होते हैं। इन सूचकांकों में आम तौर पर सरकारी सिक्योरिटीज और सरकारी कंपनियों के बॉन्ड होते हैं।
वित्त वर्ष 2011-12 और वित्त वर्ष 2015-16 के बीच की अवधि में सरकारी इंफ्रा फाइनेंस कंपनियों द्वारा टैक्स फ्री बॉन्ड जारी किए गए थे। ये बांड शेयर बाजारों में लिस्ड रहे और अब बीएसई और एनएसई के कैश सेगमेंट में इनमें कारोबार हो रहा है। निवेशक इन बॉन्डों को - अपने डीमैट खातों के माध्यम से - सेकेंडरी बाजार से खरीद सकते हैं। ये बांड सालाना ब्याज देते हैं, जो टैक्स फ्री है।
सैलेरी वाले परंपरागत निवेशकों के लिए स्वैच्छिक भविष्य निधि (वीपीएफ) एक शानदार टैक्स एफिशिएंट और सेफ निवेश ऑप्शन हो सकता है। ऐसे व्यक्ति अपने मूल वेतन का 100 प्रतिशत तक वीपीएफ में योगदान कर सकते हैं। यहां निवेश किया गया पैसा टैक्स फ्री रिटर्न दिलाता है। पर यदि किसी वित्तीय वर्ष में योगदान 2.5 लाख रुपये से अधिक है, तो अतिरिक्त योगदान पर मिले ब्याज पर टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा। वीपीएफ का चुनाव करते समय इस पहलू को ध्यान में रखने की जरूरत है।
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