नई द‍िल्‍ली: एटीएम से कैश निकासी करते वक्त ग्राहकों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ जाता है। अक्सर देखा गया है कि कैश निकासी करते वक्त ग्राहक के खाते से पैसा तो काट लिए जाते हैं लेकिन एटीएम से कैश नहीं निकल पाता।

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कई बार एटीएम में ट्रांजेक्शन फेल होने के पीछे टेक्नीकल प्रॉब्लम भी होती हैं। तो अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ कि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन फेल हो गया और आपके पैसे वापस नहीं आए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह समस्या सिर्फ आप के साथ नहीं हुई है। इस तरह की शिकायतें रोजाना बैंकों के पास आती है।

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बैंक को रोजाना देने होंगे 100 रुपये का हर्जाना

इस तरह के मामलों में खाते से कटी रकम बैंक को तुरंत लौटानी होती है। अगर शिकायत दर्ज होने के सात दिनों के भीतर ग्राहक के खाते में पैसा नहीं आता है तो कार्ड जारी करने वाले बैंक को रोजाना 100 रुपये के हिसाब से हर्जाना चुकाना पड़ता है। फेल ट्रांजेक्शन के मामले में आरबीआई के ये नियम 20 सितंबर 2019 से लागू हैं। जानकारी के मुताबिक, ये नियम बैंकों के साथ-साथ एनबीएफसी पर भी लागू है। ये नियम कम्युनिकेशन लिंक के फेल होने पर, एटीएम में कैश नहीं होने पर , टाइम ऑउट सेशन होने पर भी लागू होते है। एटीएम में कार्ड ट्रांजेक्शन फेल होने के संबंध में आरबीआई के नियम एकदम साफ हैं। ये अन्य बैंकों के एटीएम में भी ट्रांजेक्शन फेल होने पर लागू हैं।

जानि‍ए क्‍या कहता है आरबीआई
  • अपने बैंक के एटीएम में कार्ड का इस्तेमाल किया हो या दूसरे बैंक के एटीएम में, खाते से पैसे कटने पर अगर कैश न निकले तो कार्ड जारी करने वाले बैंक के पास तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
  • बता दें कि नियमों के अनुसार, बैंकों के लिए एटीएम बॉक्स पर संबंधित ऑफिसर का नाम और टेलीफोन नंबर/टोल फ्री नंबर/हेल्थ डेस्क नंबर डिस्प्ले करना जरूरी है।
  • अगर ट्रांजेक्शन फेल हो, पर खाते से पैसा कट जाए तो कार्ड इश्यू करने वाले बैंकों को सात दिनों के भीतर वापस पैसा क्रेडिट करना है। इन दिनों की गिनती शिकायत दर्ज होने की तारीख से की जाती है।
  • इसके साथ ही सात दिनों में बैंक समस्या का समाधान नहीं कर पाते हैं तो नियम है कि देरी के लिए उन्हें रोजाना 100 रुपये का हर्जाना देना पड़ेगा। हर्जाने की र‍कम उन्हें बिना किसी शर्त ग्राहक के खाते में डालनी होगी। फिर भले इसे ग्राहक ने क्लेम किया हो या नहीं। लेकिन, ग्राहक हर्जाने का हकदार तभी होगा अगर उसने फेल हुए ट्रांजेक्शन की शिकायत 30 दिनों के भीतर की है।
  • वहीं समय से शिकायत का निपटान न होने पर ग्राहक बैंक का जवाब पाने से 30 दिनों के भीतर बैंकिंग ओम्बड्समैन से शिकायत कर सकता है। वह उस स्थिति में भी ओम्बड्समैन का दरवाजा खटखटा सकता है अगर वह बैंक के जवाब से संतुष्ट नहीं है या बैंक उसे जवाब नहीं देता है।
  • जानें ट्रांजेक्शन और मुआवजे की डिटेल

    एटीएम ट्रांजेक्शन
    - एटीएम ट्रांजेक्शन में खाते से पैसे कटे लेकिन कैश नहीं निकला
    - ट्रांजेक्शन के बाद से 5 दिन में खाते में पैसा वापस लौटाना होगा
    - 5 दिन ( T+5) से ज्यादा वक्त लगा तो ग्राहक को हर्जाना मिलेगा
    - हर रोज 100 रुपए के हिसाब से ग्राहक को हर्जाना देने का निर्देश।

    यूपीआई से फंड ट्रांसफर
    - अगर खाते से पैसे कटे लेकिन जिसे भेजा गया उसके खाते में नहीं पहुंचे
    - ऐसे में ट्रांजेक्शन के 1 दिन (T+1) के भीतर रकम वापसी जरूरी
    - बैंक ऐसा नहीं कर पाए तो दूसरे दिन से 100 रुपए रोजाना हर्जाना मिलेगा

    यूपीआई से मर्चेंट पेमेंट
    - खाते से रकम कटी पर मर्चेंट तक नहीं पहुंची तो T+5 दिन में रिवर्सल
    - तय मियाद में ऑटो रिवर्सल नहीं तो 100 रुपए रोजाना हर्जाना देना होगा।

    कार्ड टू कार्ड ट्रांसफर
    - एक कार्ड से डेबिट हुआ लेकिन दूसरे कार्ड मे रकम ट्रांसफर नहीं हुई
    - ऐसे में ट्रांजेक्शन के बाद अधिकतम 1 दिन (T+1) में रिवर्सल
    - ट्रांजेक्शन के बाद दूसरे दिन से 100 रुपए रोजाना हर्जाना लगेगा

    पीओएस से ट्रांजेक्शन
    - खाते से पैसे कटे लेकिन मर्चेंट को रकम का कंफर्मेशन नहीं आया
    - ऐसे में ट्रांजेक्शन के 5 दिन (T+5) के भीतर कटे रकम की वापसी
    - ट्रांजेक्शन के बाद छठवें (6th) दिन से 100 रुपए रोजाना का ग्राहक को हर्जाना

    आधार पे से ट्रांजेक्शन
    - खाते में क्रेडिट करने में दूरी की स्थिति में हर्जाना देना होगा
    - ट्रांजेक्शन के 5 दिन (T+5) बाद तक की मियाद में रकम वापसी
    - वापसी में देरी तो छठवें (6th) दिन से 100 रुपए रोजाना पेनाल्टी लगेगी

    आईएमपीएस से ट्रांजेक्शन
    - खाते से रकम कटी लेकिन भेजे जाने वाले के खाते में नहीं पहुंची
    - ट्रांजेक्शन के एक दिन बाद की मियाद तक रकम वापसी जरूरी
    - रकम वापस खाते में नहीं आई तो दूसरे दिन से 100 रु हर्जाना

    इन कारणों से भी होते ट्रांजेक्शन फेल

    बैंकों को भेजे गए आरबीआई के सर्कुलर के मुताबिक, ट्रांजेक्शन फेल होने के कई कारण ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें कस्टमर की गलती न हो, जैसे कम्युनिकेशन लिंक्स में गड़बड़ी, एटीएम में कैश न होना, टाइम आउट सेशंस आदि। अगर इनमे से किसी वजह से कस्टमर का ट्रांजेक्शन फेल हुआ है तो बैंकों को मुआवजा देना होगा। आरबीआई ने कस्टमर्स द्वारा शिकायत या क्लेम के बिना ही उन्हें मुआवजा दिए जाने का निर्देश दिया है। अगर किसी कस्टमर को मुआवजा नहीं मिलता है तो वह रिजर्व बैंक के बैंकिंग लोकपाल को शिकायत कर सकता है।