नई दिल्ली: बैंकों में खोले जाने वाले अकाउंट कई तरह के होते हैं। देश में ज्यादातर लोगों की सैलरी सेविंग अकाउंट में आती है। इसके अलावा निवेश और लोन भी उसी अकाउंट के तहत लिया जाता है। लेकिन सेविंग अकाउंट में आम तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले कम ब्याज दर मिलती है।
कुछ छोटे और नए प्राइवेट बैंक हैं जो कई बड़े प्राइवेट और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में सेविंग अकाउंट पर अधिक ब्याज देते हैं। आप अपने इमरजेंसी फंड को जमा करने के लिए सेविंग अकाउंट उपयोग कर सकते हैं। बैंकों में सबसे ज्यादा सेविंग्स अकाउंट खोले जाते हैं। इस बात का भी ध्यान देना बेहद जरुरी है कि सेविंग अकाउंट में जमा हमारे पैसे पर कितना ब्याज मिलती है यह जानना चाहिए। आज हम आपको ऐसे 2 बैंकों के बारे में बताएंगे जहां बचत खाते पर ब्याज दर काफी अच्छा मिल रहा है।
बता दें कि सेविंग अकाउंट पर अपने ग्रााहकों को बंधन बैंक 7.15 फीसदी और आईडीएफसी फस्ट बैंक 7 फीसदी की दर से ब्याज दे रहे हैं। जबकि अन्य दूसरे प्राइवेट बैंक 6.75 फीसदी तक ब्याज देते हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंक भी ब्याज दर देते हैं। उदाहरण के लिए, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक 7 फीसदी और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक 6.5 फीसदी की दर से इंट्रेस्ट रेट ऑफर दे रहे हैं।
इसके बाद भी बड़े प्राइवेट बैंकों और सरकारी बैंकों के मुकाबले ये ब्याज दर अधिक है। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक 3 से 3.5 फीसदी ब्याज देते हैं, भारतीय स्टेट बैंक 2.70 फीसदी और बैंक ऑफ बड़ौदा सेविंग अकाउंट पर 2.75 फीसदी ब्याज देते हैं।
आपके जानकारी के लिए बता दें कि प्राइवेट बैंकों के सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस 500 रुपये से शुरू होती है और यह 10,000 रुपये तक जाती है। आईडीएफसी फस्ट बैंक में मिनिमम बैलेंस 10,000 रुपये की जरूरत होती है। बंधन बैंक में मिनिमम बैलेंस 5,000 रुपये जरूरी है। देश के बड़े प्राइवेट बैंकों में जैसे एक्सिस बैंक में मिनिमम बैलेंस 2,500 रुपये होना जरूरी है। इसी तरह एचडीएफसी बैंक में मिनिमम बैलेंस 10,000 रुपये होना चाहिए। हालांकि, ग्राहकों को अपने सेविंग्स अकाउंट के लिए बैंक चुनते समय कई बातों को ध्यान में रखना चाहिए। जैसे उन्हें बैंक लंबी अवधि में ट्रैक रिकॉर्ड, अच्छी सर्विस स्टैंडर्ड्स, बेहतर ब्रांच और एटीएम सर्विसेज नेटवर्क को ध्यान में रखना जरूरी है। अगर इस पर ग्राहकों पर अच्छा ब्याज मिल रहा तो यह उनके लिए बोनस होगा।
सामान्य शब्दों में सैलरी अकाउंट बैंक में खोला गया वह खाता है, जिसमें व्यक्ति की सैलरी आती है। सामान्य तौर पर, बैंक ये खाते कंपनियों और कॉर्पोरेशन के कहने पर खोलते हैं। कंपनी के हर कर्मचारी का अपना सैलरी अकाउंट होता है। सैलरी अकाउंट के नियम सेविंग्स अकाउंट के मुकाबले अलग हैं। बता दें कि सैलरी अकाउंट सामान्य तौर पर एम्प्लॉयर द्वारा अपने कर्मचारी को उसकी सैलरी देने के लिए खोला जाता है। जबकि, सेविंग्स अकाउंट को पैसे की बचत करने और बैंक में रखने के लिए खोला जाता है। सैलरी अकाउंट में कोई न्यूनतम बैलेंस की जरूरत नहीं होती, जबकि बैंक के सेविंग्स अकाउंट में आपको कुछ न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना जरूरी होता है।
अगर सैलरी अकाउंट में कुछ निश्चित समय तक (सामान्य तौर पर तीन महीना) के लिए सैलरी नहीं डाली गई है, तो बैंक सैलरी अकाउंट को रेगुलर सेविंग्स अकाउंट में बदल देगा जिसमें न्यूनतम बैलेंस की जरूरत है। दूसरी तरफ, अगर बैंक मंजूरी देता है, तो आप अपने सेविंग्स अकाउंट को सैलरी अकाउंट में बदल सकते हैं। यह उस स्थिति में आप कर सकते हैं, जब अपनी नौकरी बदलते हैं, और आपका नया एम्प्लॉयर उसी बैंक के साथ आपका सैलरी अकाउंट खोलना चाहता है। सैलरी अकाउंट आपका एम्प्लॉयर खोलता है। जबकि सेविंग्स अकाउंट कोई भी व्यक्ति खोल सकता है। ध्यान रखें अगर आपने अपनी नौकरी बदली है, और आपने अपने सैलरी अकाउंट को बंद नहीं किया और न ही बदला है, तो उसमें मिनिमम बैलेंस बनाएं रखें। ऐसा नहीं करने पर बैंक उस सेविंग्स अकाउंट पर मैनटेनेंस फी या जुर्माना लगा सकता है।
More Articles
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?
- ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित
- ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान