नई दिल्ली: कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन को अब 17 मई तक बढ़ा दिया गया। कोरोना की वजह से देश की अर्थव्यवस्था दशकों पीछे चली गई है। जीडीपी ग्रोथ में भी गिरावट देखने को मिल रही है। इन दिनों कोई भी सेक्टर या इंडस्ट्री सुरक्षित नहीं है। लॉकडाउन का तमाम सेक्टरों पर असर पड़ा है। सैलरी में कटौती और छंटनी की खबरें आने लगी हैं।
ऐसे में अगर आपको भी नौकरी जाने का डर सता रहा है तो इंश्योरेंस पॉलिसी मददगार साबित हो सकती है। इसे 'जॉब लॉस इंश्योरेंस' कवर के नाम से जानते हैं। कई जनरल इंश्योरेंस कंपनियां इस तरह की पॉलिसी ऑफर करती हैं। अगर आप जॉब-लॉस कवर खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो तमाम पहलुओं को देख लेने की जरूरत है। तो चलिए आपको इंश्योरेंस कवर के बारें में बता दें।
कोई भी इंश्योरेंस कंपनी स्टैंड-अलोन यानी अलग से जॉब-लॉस इंश्योरेंस पॉलिसी ऑफर नहीं करती है। इसे अन्य पॉलिसियों के साथ केवल ऐड-ऑन में दिया जाता है। अन्य पॉलिसियां एक्सीडेंट या क्रिटिकल इलनेस जैसे बड़े खतरों को कवर करती हैं। जॉब-लॉस कवर को क्रिटिकल इलनेस, पर्सनल एक्सीडेंट कवर, होम इंश्योरेंस वगैरह जैसी पॉलिसियों के साथ दिया जाता है। वहीं एक्सपर्ट की मानें तो अभी केवल राजीव गांधी श्रमिक कल्याण योजना (आरजीएसकेवाई) के तहत अलग से अनइम्प्लॉयमेंट पॉलिसी दी जाती है। यह एकमात्र पारंपरिक बेरोजगारी इंश्योरेंस स्कीम है। इसे सरकार की तरफ से ईएसआईसी का समर्थन हासिल है। वहीं कोई भी बीमा कंपनी अलग से अनइम्प्लॉयमेंट पॉलिसी नहीं देती है। लेकिन, कई कंपनियां इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत ऐड-ऑन कवर ऑफर करती हैं। अक्सर होम लोन के मामले में ऐसा कवर दिया जाता है।
आपको बता दें कि कई पॉलिसियों में एक्सक्लूजन की शर्तें हैं जिनसे क्लेम खारिज हो जाता है। कंपनी के अधिग्रहण या विलय से छंटनी होने पर उसे जॉब-लॉस नहीं माना जाता है। सेल्फ इम्प्लॉयड व्यक्ति की बेरोजगारी को जॉब-लॉस में नहीं लिया जाता है। अपने आप इस्तीफा देने या समय से पहले रिटायरमेंट लेना भी इसमें नहीं गिना जाता है। अगर बीमित व्यक्ति की नौकरी खराब प्रदर्शन के कारण जाती है तो उसे कवर नहीं मिलेगा। कोई अनुशानात्मक कार्रवाई होने पर नौकरी जाने पर भी क्लेम नहीं किया जा सकता है। प्रोबेशन पीरियड में नौकरी जाने पर भी यही बात लागू होती है।
बीमा कंपनी केवल तीन सबसे बड़ी ईएमआई का भुगतान करती है। अमूमन यह आपकी इनकम के 50 फीसदी तक होता है। एक से तीन महीने के वेटिंग पीरियड के बाद कवर अमल में आता है। पॉलिसी अवधि के दौरान एक बार क्लेम किया जा सकता है।
- कंपनी के सेवेरेंस पे (कंपनी से अलग होने पर मुआवजे के तौर पर मिलने वाली रकम) देने पर क्या आप क्लेम पाने के हकदार होंगे?
- क्या कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार टर्मिनेशन से पहले कंपनी के नोटिस देने पर क्लेम मिलेगा?
- तब क्या होगा अगर नौकरी से निकाला जाता है और साबित करने के लिए इसका लिखित दस्तावेज नहीं है?
-ध्यान रखें कि जॉब-लॉस कवर के लिए सभी इंश्योरेंस कंपनियों की शर्तें एक जैसी नहीं होती हैं। इसलिए कुछ बातों के बारे में पहले ही पूछ लेना बेहतर है।
- छंटनी का सबूत देने पर ही क्लेम मान्य होता है। केवल तभी बीमा कंपनी क्लेम का भुगतान करती हैं। अगर सबूत नहीं है तो क्लेम शायद ही मिले।
- आप खुद ही देख सकते हैं कि कि जॉब-लॉस कवर की सीमाएं हैं।
- इसका दायरा बहुत सिकुड़ा हुआ है।
- जॉब-लॉस इंश्योरेंस ऐड-ऑन बहुत निर्भर करने लायक विकल्प नहीं है।
- वहीं सबसे भरोसेमंद विकल्प इमर्जेंसी फंड बनाना है। यह दो से चार महीनों के खर्च के बराबर होना चाहिए।
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