नई दिल्ली, मार्च 5। होम लोन रीफाइनेंस, जिसे आम तौर पर बैलेंस ट्रांसफर के नाम से जाना जाता है, बकाया लोन को एक नए ऋणदाता (बैंक या फाइनेंस कंपनी) में ट्रांसफर करने का तरीका है। अपने लोन को किसी दूसरे बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी को ट्रांसफर करना तभी मददगार होता है, जब दूसरा लेंडर कम ब्याज दर की पेशकश कर रहा हो। रीफाइनेंस में, मौजूदा ऋणदाता के साथ बकाया लोन का निपटान नए ऋणदाता द्वारा किया जाता है जो फिर शेष लोन को अपने ऊपर ले लेता है। एक बार लोन रीफाइनेंस हो जाने के बाद, पिछला लोन अकाउंट बंद कर दिया जाता है। फिर आपको नये बैंक या कंपनी को बकाया लोन की ईएमआई अदा करनी होती है।
मान लीजिए कि किसी ने साल 2016 में 30 लाख रु का लोन लिया। उस समय अनुमानित ब्याज दर 9.25 फीसदी थी। मान लिया जाए कि लोन की अवधि थी 20 साल की तो ऐसे व्यक्ति की ईएमआई अब तक रही होगी 27,476 रु। अब 2022 में इस शख्स का बकाया लोन करीब 24 लाख रु होगा। क्योंकि इसने 6 सालों में बाकी लोन चुका दिया होगा।
अब समझिए कि साल 2022 में लोन अमाउंट रहा 25 लाख रु। मगर ब्याज दर इस समय अनुमानित 6.90 फीसदी है। लोन की अवधि होगी 14 साल। इस तरह ईएमआई होगी करीब 22,000 रु। ऐसे में दो बड़े फायदे मिले। पहला कम ब्याज दर वाला लोन मिला। दूसरा मासिक ईएमआई 5 हजार रु कम हो गयी। कहा जाता है कि 0.25 फीसदी ब्याज दर का प्रभाव भी बहुत अधिक होता है। जबकि यहां तो करीब 2.35 फीसदी ब्याज दर कम मिल रही है।
आम तौर पर सलाह दी जाती है कि अपने लोन के शुरुआती वर्षों के दौरान होम लोन रीफाइनेंस ऑप्शन को चुनने की सलाह दी जाती है। यह तरीका आपको बहुत बड़ी ब्याज राशि बचाने में मदद कर सकता है। मान लीजिए कि आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और आपका क्रेडिट स्कोर काफी बढ़ गया है, लेकिन आपका मौजूदा ऋणदाता आपके होम लोन की ब्याज दर को और कम करने के लिए तैयार नहीं है, तो आप अन्य बैंकों या वित्तीय संस्थानों में लोन ट्रांसफर का विकल्प चुन सकते हैं।
मगर ब्याज दर और इससे आपकी ईएमआई और अवधि पर पड़ने वाले अंतर को ध्यान में रखें। रीफाइनेंस पर प्रोसेसिंग और लीगल शुल्क जैसी अतिरिक्त लागतें लग सकती हैं। इसके अलावा, सभी प्रकार के अन्य शुल्कों की जांच करें जैसे कि फोरक्लोज़र शुल्क (आमतौर पर फ्लोटिंग रेट लोन पर लागू नहीं होते हैं, लेकिन अधिकांश बैंक फिक्स्ड रेट लोन को फोरक्लोज़ करते समय इसे लगाते हैं), दस्तावेज़ीकरण शुल्क, एमओडी शुल्क, आदि।
एक और महत्वपूर्ण चीज चेक करें। ये हैं नियम और शर्तें। इन्हें ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आप अपने होम लोन को रीफाइनेंस करते समय कोई एक्स्ट्रा लायबिलिटी तो नहीं ले रहे। अपने होम लोन को रीफाइनेंस करने की योजना बनाते समय लंबी अवधि के फायदों और कमियों पर भी ध्यान दें।
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