नई दिल्ली, सितंबर 27। बीमा खरीदना जरूरी है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि आप जीवन में किसी भी प्रकार की हेल्थ समस्या का सामना करने के लिए आर्थिक रूप से सुरक्षित हैं। यही कारण है कि बीमा फाइनेंशियल प्लानिंग का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। बीमा कंपनी स्वास्थ्य, यात्रा, मोटर वाहन और घर को सुरक्षित करने के लिए बीमा पॉलिसी ऑफर करती है। इनमें स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के लिए आप प्रीमियम अदा करते हैं, वो कई चीजों से तय होता है। इनमें उम्र, कुल कवरेज (बीमा राशि), आपका मेडिकल इतिहास, जेंडर, लाइफस्टाइल और नौकरी जैसे फैक्टर शामिल हैं। उदाहरण के लिए किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को उन लोगों की तुलना में अधिक प्रीमियम अदा करना होगा, जो कोई दवा नहीं ले रहे हैं और किसी बीमारी से ग्रसित नहीं है। यहां हम आपके पास उन बाकी फैक्टर्स की डिटेल शेयर करेंगे, जिनके बेसिस पर हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम तय होता है।
बीमा प्रीमियम की कैल्कुलेशन के लिए सबसे अहम फैक्टरों में से एक है पॉलिसीधारक की उम्र। अगर आप युवा हैं तो आपको हेल्थ के लिहाज से कम जोखिम वाला माना जाता है। इस तरह कम आयु में पॉलिसी पर प्रीमियम कम होता है। दूसरी बात युवा लंबे समय तक पॉलिसी कवरेज और प्रीमियम का भुगतान करते हैं। इससे बीमा कंपनी को ज्यादा इनकम होती है। ये भी एक कारण है युवा ग्राहकों के लिए सस्ते प्रीमियम का।
जो लोग अक्सर धूम्रपान और शराब पीते हैं, उनमें जानलेवा बीमारी होने की संभावना अधिक होती है। यदि आप इस कैटेगरी में आते हैं तो आपको अधिक प्रीमियम का भुगतान करना होगा। ये सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक हो सकता है।
बीमा इंडस्ट्री में प्रीमियम जेंडर के अनुसार भी बदलता है। एक महिला पॉलिसीधारक को समान प्रोफ़ाइल के बावजूद पुरुष की तुलना में कम प्रीमियम का भुगतान करना होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि पुरुषों को हाई रिस्क वाला माना जाता है और उनकी जीवन प्रत्याशा कम होती है।
पॉलिसी की अवधि जितनी लंबी होगी, प्रीमियम उतना ही कम होगा। लंबी अवधि की पॉलिसी में बीमा कंपनी को लंबे समय तक प्रीमियम मिलता है और इसलिए वे लंबी कवरेज वाली पॉलिसियों के लिए कम चार्ज लेती हैं। दूसरा है आपका काम। यदि आप निर्माण, खनन या शिपिंग जैसे उच्च जोखिम वाली इंडस्ट्री में काम करते हैं, तो आपसे अधिक प्रीमियम लिया जाएगा। उन लोगों के लिए प्रीमियम कम होगा जो ऑफिस में कार्यरत हैं और उनके कार्यस्थल पर किसी दुर्घटना का शिकार होने का जोखिम कम है।
जो लोग सालाना प्रीमियम का भुगतान करते हैं, वे छमाही, तिमाही या मासिक प्रीमियम का भुगतान करने वालों की तुलना में कुछ पैसे बचाते हैं। सालाना भुगतान के मामले में, बीमाकर्ता रेगुलर एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट बचाती हैं। इसलिए इसे तिमाही और मासिक किश्तों की तुलना में सस्ते दर पर उपलब्ध कराया जाता है।
डायबिटिज जैसी कुछ बीमारियों को वंशानुगत माना जाता है। इसलिए जिन लोगों का पारिवारिक इतिहास ऐसी बीमारियों का रहा है, उन्हें दूसरों की तुलना में अधिक प्रीमियम का भुगतान करने के लिए कहा जा सकता है।
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