शनिवार, 25 जुलाई। QRMP (Quarterly Return Monthly Payment) स्कीम के तहत, पहले और दूसरे महीने का टैक्स PMT-06 फॉर्म के जरिए अगले महीने की 25 तारीख तक जमा करना होता है। उदाहरण के लिए, जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में जुलाई महीने का PMT-06 पेमेंट 25 अगस्त तक करना होगा। इसे सिर्फ एक डेडलाइन न मानें, बल्कि अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग का एक जरूरी हिस्सा समझें।
आखिर 25 तारीख को किसे पेमेंट करना है? ₹5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले वो रजिस्टर्ड कारोबारी जो QRMP स्कीम का हिस्सा हैं, उन्हें शुरुआती दो महीनों की कैश लायबिलिटी जमा करनी होती है। इसके लिए आपके पास दो विकल्प हैं: पहला 'फिक्स्ड सम मेथड' (जिसे 35% चालान भी कहा जाता है) और दूसरा 'सेल्फ-असेसमेंट मेथड', जिसमें आप असल आउटपुट टैक्स और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का हिसाब लगाकर भुगतान करते हैं।
PMT-06 GST पेमेंट: 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट?
अगर कैश की कमी है और पिछली तिमाही के आंकड़े स्थिर रहे हैं, तो 35% वाला विकल्प चुनना बेहतर है। इसमें पोर्टल खुद ही चालान भर देता है और अगर आप ड्यू डेट तक पेमेंट कर देते हैं, तो आप ब्याज से बच जाते हैं। जैसा कि पोर्टल पर भी बताया गया है, "अगर अगले महीने की 25 तारीख तक पेमेंट कर दिया जाता है, तो कोई ब्याज नहीं लगेगा।" देरी होने पर नेट कैश पर सालाना 18% की दर से ब्याज देना होगा।
QRMP PMT-06: ड्यू डेट, ब्याज और पेमेंट के आसान टिप्स
पेमेंट का तरीका: सबसे पहले लॉग-इन करें, फिर Services → Payments → Create Challan पर जाएं। यहां 'Monthly payment for quarterly return' चुनें, फिर 35% या सेल्फ-असेसमेंट में से एक विकल्प सिलेक्ट करें और नेटबैंकिंग, UPI, NEFT या RTGS के जरिए भुगतान करें। नेटबैंकिंग और UPI से पैसा आमतौर पर बैंक कंफर्मेशन मिलते ही इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में क्रेडिट हो जाता है। NEFT या RTGS में थोड़ा समय लग सकता है, खासकर बैंक मेंटेनेंस के दौरान।
अगर बैंक से पैसे कट जाएं लेकिन लेजर अपडेट न हो, तो 'चालान आइडेंटिफिकेशन नंबर' (CIN) का इंतजार करें और फिर क्रेडिट के लिए फॉर्म PMT-07 भरें। अगर पोर्टल धीमा चल रहा हो, तो ब्राउज़र बदलें या ऑफ-पीक घंटों में कोशिश करें। वीकेंड पर नेटबैंकिंग या UPI को प्राथमिकता दें और कट-ऑफ टाइम के करीब NEFT/RTGS करने से बचें।
25 तारीख का ध्यान रखना क्यों जरूरी है? क्योंकि देरी होने पर लगने वाला 18% ब्याज काफी महंगा पड़ता है। इसकी तुलना अगर बैंकों की 6.4-6.9% वाली FD से करें, तो अंतर साफ नजर आता है। नीचे दी गई टेबल से समझें कि ₹1 लाख पर ब्याज का गणित कैसे बदलता है। ध्यान रहे, PMT-06 पर ब्याज केवल देरी वाले दिनों के लिए ही लागू होता है।
| सालाना दर | 5 साल | 10 साल | 15 साल |
|---|---|---|---|
| GST ब्याज 18% | ₹2,28,776 | ₹5,23,384 | ₹11,97,375 |
| FD दर 6.5% (उदाहरण) | ₹1,37,009 | ₹1,87,714 | ₹2,57,184 |
जुलाई के हिसाब-किताब का मिलान अभी से शुरू कर दें और 25 अगस्त के पेमेंट के लिए फंड तैयार रखें। पेमेंट के बाद CIN वाली रसीद रिकॉर्ड के लिए जरूर सेव करें। चाहे आप 35% चालान का रास्ता चुनें या सेल्फ-असेसमेंट का, समय पर PMT-06 पेमेंट करने से आप भारी ब्याज से बचेंगे और आपका लेजर GSTR-3B फाइलिंग के लिए तैयार रहेगा।
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