नई दिल्ली, अप्रैल 17। राशन कार्ड धारकों के लिए खुशखबरी है। राशन लेने के लिए अब बाहर जाने की जरूरी नहीं है बल्कि घर बैठे ही आपको राशन मिल जाएगा। बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर और प्रवासियों को किफायती दाम पर अनाज मिल सके इसके लिए सरकार की ओर से वन नेशन वन राशन कार्ड स्कीम चलाई जा रही है। महामारी की दूसरी लहर फैल रही है, ऐसे में घर से बाहर निकला बिलकुल सुरक्षित नहीं है। लेकिन राशन के लिए घर से निकलना मजबूरी है और राशन की लाइनों में खड़ा होना खतरे से खाली नहीं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने लोगों को बड़ी सहूलियत दी है।
भीड़ और लंबी कतारों के चलते कई बार राशन लेने में दिक्कत होती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने मेरा राशन ऐप लॉन्च किया है। आप घर बैठे ही अपने मोबाइल से राशन का ऑर्डर दे सकते हैं। इसके जरिए ही राशन बुक कर सकते हैं। ये मोबाइल ऐप सरकार की ओर से शुरू की गई वन नेशन वन राशन कार्ड योजना की पहल का हिस्सा है। मेरा राशन ऐप का लाभ लेने के लिए सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर से इसे डाउनलोड करें। इंस्टालेशन के बाद ऐप को ओपन करके इसमें अपने राशन कार्ड की डिटेल भरिए। ऐसा करते ही आपका रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा। इसके बाद आप ऐप से राशन मंगवा सकते हैं।
- इस ऐप का फायदा सबसे ज्यादा प्रवासी लोगों को होगा, क्योंकि एक शहर से दूसरे शहर जाने पर कई बार उन्हें राशन केंद्र की जानकारी नहीं होती है। मगर इस ऐप से ये समस्या दूर हो जाएगी।
- राशन कब और कैसे मिलेगा समेत अन्य जानकारी कार्ड होल्डर्स इस ऐप की मदद से खुद ले सकेंगे।
- राशनकार्ड धारक इस ऐप के जरिए हाल ही में किए गए लेन-देन का डिटेल भी देख सकेंगे। वे देख सकेंगे कि उन्हें किस महीने कितना राशन मिला है।
- इस ऐप के जरिए आप अपने नजदीकी राशन केंद्र की सटीक जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके साथ ही राशन विक्रेता की भी पूरी डिटेल देख सकते हैं।
- राशन कार्ड होल्डर्स इस ऐप के जरिए अपने सुझाव या शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।
मेरा राशन ऐप इस समय हिंदी और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है, लेकिन इसे जल्द ही अन्य 14 भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जाएगा। बता दें कि ज्यादातर प्रवासी दूसरे राज्यों से आते हैं जिसके चलते उन्हें भाषा की दिक्कत हो सकती है। इसलिए उनकी सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इसमें प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं को जोड़ा जाएगा। जिससे ऐप का इस्तेमाल करने में उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। दिसंबर, 2020 तक इस योजना से सिर्फ 12 राज्यों को ही जोड़ा जा सका था। अब इस योजना से 32 राज्यों को जोड़ा जा चुका है।
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