नयी दिल्ली। सोना कई उद्देश्यों के लिए खरीदा जाता है। इनमें बचत, मुद्रास्फीति से बचाव, एसेट एलोकेशन जैसी चीजें शामिल हैं। भारत में गोल्ड की तरफ लोगों का एक इमोश्नल रुझान भी होता है। जबकि ज्यादातर भारतीय परिवारों के पास सोना होता है, लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता कि सोने की अधिकतम कितनी मात्रा कानूनी रूप से अपने पास रखी जा सकती है। यहां हम आपको बताएंगे कि आप कितना सोना अधिकतम अपने पास रख सकते हैं।
गोल्ड ज्वेलरी एक अच्छा निवेश ऑप्शन माना जाता है क्योंकि यह आपको महंगाई से बचाता है। जिस तरह से पेपर मनी की वैल्यू गिरती है, उस तरह सोने की वैल्यू नहीं घटती। शेयरों की तुलना में सोने की अपनी वैल्यू कम होने की संभावना नहीं होती। यह मानते हुए कि किसी व्यक्ति के पास कितना सोना हो सकता है, इसकी कोई सीमा नहीं है, ये कई लोगों के लिए एक लोकप्रिय निवेश विकल्प होता है। सोने से मतलब सिर्फ ज्वेवरी नहीं होता, बल्कि गोल्ड बार और अन्य सोने की चीजें भी इसमें शामिल होती हैं।
वास्तव में अगर आप यह बता सकते हैं कि सोना कहां से आया है (कानूनी तौर पर सही रास्ता) तो आप जितना चाहे उतना सोना अपने पास रख सकते हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि आप अपने सोने के निवेश ऑरिजिन को सही साबित कर सकते हैं तो आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि आपकी चेकिंग हो तो भी आप एक लिमिट तक सोना अपने पास रख सकते हैं। जानते हैं वो लिमिट क्या है।
- एक विवाहित महिला 500 ग्राम तक सोना रख सकती है
- एक अविवाहित महिला के पास 250 ग्राम तक सोना हो सकता है
- एक पुरुष के पास 100 ग्राम तक सोना हो सकता है
- यदि आप पहले से चुका दिए गए टैक्स के पैसे से ज्वेलरी खरीदते हैं तो कोई सीमा नहीं है। न ही कोई लिमिट विरासत में मिले सोने पर रखी गयी है
आयकर अधिनियम 1961, धारा 132, भारतीय टैक्स अधिकारियों को किसी सर्च के दौरान मिली अज्ञात ज्वेलरी, बुलियन या कीमती आर्टिकल को जब्त करने की शक्ति देता है। 1 दिसंबर 2016 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा था कि अगर निवेश या विरासत के स्रोत को स्पष्ट किया जा सकता है तो सोने के आभूषण रखने पर कोई लिमिट नहीं है। दूसरी ओर करदाता के पास घर या बैंक लॉकर में रखे सोने के स्रोत को चेक करने या चुनौती देने का अधिकार है। हालांकि टैक्स अधिकारियों को सर्कुलर में तय सीमाओं के भीतर किसी भी सोने के आभूषण को जब्त करने की अनुमति नहीं है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सर्कुलर में जारी किया गया नियम केवल सोने के गहने और आभूषण पर लागू होता है। सोने के सिक्के, सोने की छड़, हीरे या अन्य आभूषण पर लागू नहीं होता है।
जब आप सोना खरीदते हैं तो ज्वेलर से मिलने वाला बिल आपके निवेश का सबसे अच्छा सबूत होता है। यदि सोना आपको विरासत में मिला या दिया गया है, तो आपको उस व्यक्ति की 'वसीयत' या कुछ अन्य पारिवारिक समझौता, गिफ्ट डीड या रसीद आदि रखनी चाहिए। यदि ऐसा कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो अधिकारी आपके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा, रीति-रिवाजों और परंपराओं पर विचार कर सकते हैं ताकि यह तय हो सके कि आपका तर्क सही है या नहीं।
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