अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो ध्यान दें! कंपनियों के लिए अपने कर्मचारियों को फॉर्म 16 (Form 16) जारी करने की आखिरी तारीख 15 जून है। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) आसानी से फाइल करने के लिए यह सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट है। इसमें आपकी कुल सैलरी और कटे हुए टैक्स (TDS) का पूरा ब्योरा होता है। तो देर किस बात की, आज ही अपना ईमेल चेक करें। समय पर आईटीआर भरने से आप आखिरी दिनों की भागदौड़ और परेशानी से बच जाएंगे।

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फॉर्म 16 के दो हिस्से होते हैं- पार्ट A और पार्ट B। पार्ट A में सरकार के पास जमा किए गए टैक्स की जानकारी होती है, जबकि पार्ट B में आपकी सैलरी और सेक्शन 80C जैसी कटौतियों (Deductions) का विवरण दिया जाता है। अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है, तो अपनी सभी पुरानी कंपनियों से फॉर्म 16 जरूर लें। साथ ही, इस डेटा को अपने एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) से क्रॉस-चेक करना न भूलें।

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Form 16, AIS और ITR का मिलान है जरूरी

अगर आपको आज फॉर्म नहीं मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले अपने ऑफिस के पेरोल विभाग (Payroll Department) से संपर्क करें। इसके अलावा, आप इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर अपना फॉर्म 26AS भी चेक कर सकते हैं। इस पोर्टल पर आपके पैन (PAN) से जुड़े सभी टैक्स क्रेडिट की जानकारी मिल जाएगी। यह सुनिश्चित कर लें कि आपकी कंपनी ने टैक्स सही तरीके से जमा किया है या नहीं।

निवेश की अवधिFD पर रिटर्न (अनुमानित)इक्विटी पर रिटर्न (अनुमानित)
5 साल7.0%12.0%
10 साल7.2%13.5%
15 साल7.5%15.0%

टैक्स भरते समय 'न्यू' और 'ओल्ड' टैक्स रिजीम के बीच सही चुनाव करना एक बड़ा फैसला है। अब न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) डिफॉल्ट ऑप्शन बन गया है। इसमें टैक्स की दरें तो कम हैं, लेकिन आपको हाउस रेंट अलाउंस (HRA) जैसी कई कटौतियों का फायदा नहीं मिलता। अगर आपने शेयरों से कमाई की है, तो कैपिटल गेन्स की जानकारी बिल्कुल सही-सही भरें। रिफंड जल्दी पाने के लिए अपने रिटर्न को ई-वेरिफाई (e-verify) करना न भूलें।

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सावधान! टैक्स सीजन में होने वाली गलतियों और स्कैम से बचें

टैक्स सीजन के दौरान फिशिंग स्कैम (Phishing Scams) से सावधान रहें। आजकल जालसाज एसएमएस या ईमेल के जरिए फर्जी रिफंड लिंक भेज रहे हैं। किसी भी अनजान सोर्स के साथ अपनी बैंक डिटेल्स या पासवर्ड कभी शेयर न करें। याद रखें, इनकम टैक्स विभाग केवल आधिकारिक माध्यमों से ही आपसे संपर्क करता है। रिफंड की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए अपने बैंक अकाउंट को पहले ही प्री-वैलिडेट (Pre-validate) कर लें।

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इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय धैर्य और सटीकता बहुत जरूरी है। अपने फॉर्म 16 की हर एंट्री का मिलान AIS से जरूर करें। इससे डेटा में गड़बड़ी नहीं होगी और बाद में टैक्स डिमांड का नोटिस आने का खतरा भी टल जाएगा। ई-वेरिफिकेशन के बाद ज्यादातर टैक्सपेयर्स का रिफंड जल्द ही आ जाता है। जुलाई की डेडलाइन से पहले अपनी सभी कटौतियों का फायदा उठाने के लिए आज ही तैयारी शुरू कर दें।