देश के करोड़ों LPG कनेक्शन वालों लिए जरूरी अपडेट है. क्योंकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने LPG ग्राहकों के वेरिफिकेशन के लिए आधार बेस्ड ई-केवाईसी शुरू कर दिया है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में HPLC, IOCL और BPCL शामिल हैं. इससे फर्जी कनेक्शन को पहचानने में मदद मिलेगी. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इसका उद्देश्य धोखाधड़ी करने वाले ग्राहकों की पहचान करना है. साथ ही उन्हें हटाना भी है.

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LPG सिलेंडर डिलीवर करते समय डिलीवरी कर्मचारी कस्टमर्स के क्रेडेंशियल्स को वेरिफाई करते हैं. इसे ऐप के जरिए आधार क्रेडेंशियल्स को कैप्चर करते हैं. कस्टमर्स अपनी सुविधानुसार प्रोसेस को पूरा करने के लिए अपने डिस्ट्रिब्यूटर के पास भी जा सकते हैं.

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कमर्शियल के मुकाबले रसोई गैस मिलता है सस्ता

कनेक्शन लेने वालों में फर्जीवाड़ा करने वालों लोगों पर सरकार एक्शन लेने की पूरी तैयारी में है. सख्त एक्शन के लिए प्रॉसेस की शुरुआत होने जा रहा है. इसके तहत रसोई गैस लेकर कमर्शियल इस्तेमाल पर कड़ा एक्शन हो सकता है. बता दें कि रसोई गैस, कमर्शियल गैस के मुकाबले कम कीमत पर मिलता है. 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1,646 रुपए है. वहीं, रसोई गैस सिलेंडर 14.2 किलो की कीमत 803 रुपए है.

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फ्रॉड पर लगेगा लगाम!

गैस कनेक्शन से जुड़ी फ्रॉड को रोकने की दिशा में सरकार एक्शन में है. इसकी वजह यह सुनिश्चित करने की है कि सब्सिडी सही लाभार्थियों तक पहुंचे. बता दें कि eKYC एक इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन प्रोसेस है, जो किसी व्यक्ति की पहचान को वेरिफाई करने के लिए किया जाता है. इसके इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस और बायोमेट्रिक डेटा का इस्तेमाल होता है. यह मेथर्ड फ्रॉड जैसे रिस्क को कम करता है. साथ ही उपयोगकर्ता की सुरक्षा को बढ़ाती है.

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ई-केवाईसी के लिए डेडलाइन तय नहीं

LPG कनेक्शन को लेकर सरकार की ओर से शुरू की गई ई-केवाईसी प्रोसेस का मकसद फर्जीवाड़े को रोकना है. इस दिशा में e-KYC को पूरा करने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों या केंद्र सरकार द्वारा कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है.