Dollar vs Rupee: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में लगातार कमजोरी हो रही है. बजट के बाद लगातार गिरावट का रिकॉर्ड बन रहा. करेंसी मार्केट में 26 जुलाई को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 83.72 तक फिसला. इसकी वजह विदेशी बाजारों में मजबूत होती अमेरिकी करेंसी और घरेलू बाजारों से निकलता विदेशी निवेश है.

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शेयर बाजार से विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे हैं. इसकी वजह कैपिटल गेन पर टैक्स दरों में इजाफा है. ऐसे में समझने वाली बात ये है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की कमजोरी से आम जनता पर किस तरह असर पड़ता है....

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महंगाई और EMI पर होगा असर

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जब भी रुपए की वैल्यू घटती है, तब महंगाई में बढ़ोतरी देखा जाता है. महंगाई को काबू करने के लिए RBI पॉलिसी दरों में इजाफा करता है. इसका उदाहरण हमने पिछले दिनों देखा ही. सेंट्रल बैंक की ओर से पॉलिसी दरों में इजाफा से लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI यानी लोन के लिए भुगतान होने वाली किस्त में इजाफा हो जाता है. यानी ग्राहकों को कर्ज भुगतान के लिए ज्यादा रकम अदा करनी होता है.

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विदेश में पढ़ाई होगी महंगी

डॉलर के मुकाले भारतीय करेंसी की वैल्यू घटने से विदेशों में पढ़ रहे या फिर पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को पहले से ज्यादा भुगतान करना पड़ता है. इससे विदेश में पढ़ाई करना महंगा पड़ता है.

विदेश घूमना होगा महंगा

भारतीय रुपए की वैल्यू घटने से फॉरेन ट्रिप करने वालों के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. ऐसे में विदेश यात्रा करने या विदेश घूमने का सपना देखने वाले लोगों के लिए बजट बढ़ाना होगा. क्योंकि इससे विदेशों के टूर पैकेज, रहना, खाना और घूमना सब कुछ के लिए ज्यादा पेमेंट करना होगा.

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इंपोर्ट बिल बढ़ जाएगा

डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी से विदेशों से होने वाले इंपोर्ट का बिल बढ़ जाता है. इसके तहत क्रूड ऑयल समेत अन्य जरूरी प्रोडक्ट्स के प्राइसेज बढ़ जारी हैं. इससे कंपनियों को प्रोडक्ट्स के भाव भी बढ़ाना पड़ता है. नतीजतन, कस्टमर्स को प्रोडक्ट्स पर पहले के मुकाबले ज्यादा पेमेंट करना पड़ता है.

रोजमर्रा के सामान होंगे महंगे

रुपए की कीमत गिरने का सबसे बड़ा असर पेट्रोल और डीजल की कीमत पर पड़ता है. क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से इंपोर्ट करता है. ऐसे में डॉलर की कीमत बढ़ने से कच्चे तेल के लिए ज्यादा पेमेंट करना होता है. नतीजतन, सरकार को पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी होती है, जिसका असर आम जनता की जेब पर पड़ता है.

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पेट्रोल-डीजल हो सकता है महंगा

फ्यूल रेट्स में इजाफा होने से देश में माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है. इससे सीधे तौर पर रोजमर्रा के सामान के भाव बढ़ जाएंगे. बढ़े हुए दाम से आम आदमी की जेब पर प्रभाव पड़ता है.