नई दिल्ली: आपका खाता भी एसबीआई में है तो ये खबर जरुर पढ़ें। देश के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) आम लोगों को कई तरह की सेविंग्स स्कीम्स मुहैया कराता है। एसबीआई के इन्हीं सेविंग्स स्कीम्स में से एक है एन्युटी स्कीम। इस स्कीम के तहत आप एक बार निवेश कर नियमित समय के लिए मासिक इनकम प्राप्त कर सकते है। एन्युटी पेमेंट में ग्राहक की तरफ से जमा रकम पर ब्याज लगकर एक तय समय के बाद इनकम मिलनी शुरू होती है। एसबीआई के इस स्कीम में न्यूनतम 1,000 रुपये मासिक एन्युटी के लिए जमा किया जा सकता है। इस स्कीम में अधिकतम निवेश की कोई सीमा तय नहीं की गई है। अच्छी खबर: 10 नवंबर से सस्ता होगा SBI का होम-ऑटो और पर्सनल लोन ये भी पढ़ें
एसबीआई के इस एन्युटी स्कीम में 36, 60, 84 या 120 महीने की अवधि के लिए निवेश किया जा सकता है। इस निवेश पर ब्याज दर वहीं होगी जो चुनी गई अवधि के टर्म डिपॉजिट के लिए होगी। आपको बता दें कि उदाहरण के तौर पर आप 5 साल के लिए एन्युटी डिपॉजिट करना चाहते हैं तो जमाकर्ता को 5 साल की एफडी पर लागू होने वाली ब्याज दर के हिसाब से ही ब्याज मिलेगा।
जानकारी दें कि इस स्कीम का लाभ लेने वाले जमाकर्ता की मृत्यु हो जाती है तो समय से पहले निकासी की अनुमति भी मिलती है। इस स्कीम के तहत जमा राशि का 75 फीसदी लोन भी लिया जा सकता है। हालांकि, लोन का विकल्प चुनने के बाद भी भविष्य की एन्युटी की पेमेंट लोन अकाउंट में तब तक जमा होगी जब तक की पूरा लोन वापस नहीं चुक पाता है। जैसे कि अगर आप 5 साल के लिए 10,000 रुपये की मासिक एन्युटी चाहते हैं तो आपको 7 फीसदी की ब्याज दर को ध्यान में रखते हुए 5,07,965.93 रुपये जमा करने होंगे।
अच्छी बात तो यह हैं कि इस स्कीम का लाभ कोई भी ले सकता है। इसमें व्यक्तिगत या ज्वाइंट अकाउंट, बालिग और नाबालिग भी खोल सकते हैं। इस स्कीम को दूसरे ब्रांच में अकाउंट ट्रांसफर, टीडीएस के नियम एफडी के नियमों के आधार पर ही होंगे।
आरडी, एफडी और एन्युटी रेट में अंतर जानें क्या है
एन्युटी डिपॉजिट स्कीम रिकरिंग डिपॉजिट स्कीम का ठीक उल्टा होता है। रिकरिंग डिपॉजिट में जमाकर्ता हर माह एक तय रकम जमा करता है और मैच्योरिटी पर एक निश्चित रकम मिलती है। लेकिन, एन्युटी मैच्योरिटी के मामले में इसके विपरित एक ही बार में रकम जमा करनी होती है और चुनी गई अवधि पूरी होने के बाद हर महीने एक तय रकम मिलती है। जबकि, एफडी की बात करें तो इसमें जमाकर्ता एक तय कार्यकाल के लिए रकम जमा करता है। मैच्योरिटी के समय इस रकम को ब्याज समेत वापस मिल जाता है।
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