नयी दिल्ली। लोग नौकरी से मुक्ति पाने के लिए बिजनेस शुरू करने की सोचते हैं। मगर बहुत कम लोग ही बिजनेस शुरू करते हैं, क्योंकि अधिकतर लोग असफलता के डर से कदम नहीं बढ़ा पाते। जो लोग बिजनेस शुरू करते हैं उनके लिए कई चुनौतियां सामने होती हैं। इसलिए कुछ समय बाद उनके भी बिजनेस को बंद करने की संभावना रहती है। अगर यदि आप बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं या फिर आपका पहले अपना कोई बिजनेस है तो उसे कम लागत में आगे बढ़ाने के लिए हम यहां आपको बढ़िया टिप्स देंगे।
इस समय यूरोप और अमरीका में स्टार्टअप और बाकी छोटी कंपनियां को-मार्केटिंग पर ध्यान दे रही हैं। बीते सालों में को-मार्केटिंग का तरीका काफी पसंद किया जा रहा है। इसकी एक वजह कम खर्च। आप को-मार्केटिंग के जरिए कम लागत में बढ़िया नतीजे पा सकते हैं। भारत में इस समय सिर्फ 2 फीसदी स्टार्ट-अप को-मार्केटिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। आइए जानते हैं क्या होती है को-मार्केटिंग।
को-मार्केटिंग एक तरह की डील है, जो दो कंपनियों के बीच होती है। इसके तहत दो या ज्यादा कंपनियां एक दूसरे का कंटेंट और प्रोडक्ट की डिटेल अपने प्लेटफॉर्म्स पर पेश करती हैं। ये प्रमोशन है, जो आप अपने प्लेटफॉर्म पर दूसरी कंपनी का करते हैं और वो कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर आपके बिजनेस को प्रमोट करती है। जिन डिटेल्स का आदान-प्रदान किया जाता है उनमें रेवेन्यू, ग्राहक डेटा और रेस्पोंस शामिल हैं। जानकार कहते हैं कि अवेयरनेस, कंटेंट और डेटा शेयरिंग पर ज्यादा तवज्जो दी जाती है।
को-मार्केटिंग के लिए पार्टनर चुनना अहम है। सवाल ये है कि आप किस पार्टनर को चुकें। एक जैसे सेक्टर के स्टार्टअप या कंपनियां को-मार्केटिंग डील कर सकती हैं। मगर एक जर्मन बिजनेस स्कूल के सर्वे में सामने आया कि दो ऐसे पार्टनर्स को को-मार्केटिंग करनी चाहिए जिनके ग्राहक दोनों के प्रोडक्ट या सेवाओं का इस्तेमाल करते हों। उदाहरण के लिए एक कार और एक टायर कंपनी।
को-मार्केटिंग के लिए आपको समझौता करना होगा। इसमें आपको उन चीजों को शामिल करना होगा जो शेयर की जानी हैं। को-मार्केटिंग का टाइम, किन चीजों को शेयर किया जाना है, उसकी डिटेल, ट्रेनिंग आदि पर अच्छी तरह से विचार करें। आप या आपका पार्टनर एग्रीमेंट के बाद कोई अन्य प्रोडक्ट लाएगा तो ये पहले से तय कर लें कि उसे इस एग्रीमेंट में शामिल किया जाएगा या नहीं।
मार्केटिंग में कंटेंट को अहम माना जाता है। क्योंकि ये आपके टार्गेट ऑडियंस के लिए होता है। इसलिए इसका प्रभावी होना जरूरी है। आप पार्टनर के साथ बैठकर ही इस टॉपिक पर प्लानिंग कर सकते हैं। को-मार्केटिंग में आप अपने पार्टनर को भी फायदा पहुंचाते हैं और आपको भी फायदा मिलता है। इसी से आपकी लागत कम होती है। आने वाले समय में को-मार्केटिंग का बड़े स्तर पर विस्तार हो सकता है। इसलिए अगर आप अपना बिजनेस शुरू कर चुके हैं या करने जा रहे हैं तो अपने को-मार्केटिंग पार्टनर ढूंढने में जल्दी कीजिए।
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