नयी दिल्ली। 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करने जा रही हैं। बजट के दस्तावेजों की छपाई शुरू हो चुकी है। बजट की तैयारी पूरे जोरों पर है। आपको भी बजट के लिए अपनी थोड़ी तैयारी करनी चाहिए। आपके लिए जरूरी है बजट से जुड़ी चीजों और बातों के बारे में जानना। बजट के दौरान ऐसे कई शब्द इस्तेमाल किये जाते हैं जिन्हें हम अपनी रोजाना की लाइफ में नहीं सुनते। मगर इन शब्दों का अर्थ आपके लिए जानना जरूरी है। यहां हम आपको बता रहे हैं ऐसे जरूरी शब्दों के बारे में जो आपको केंद्रीय बजट पेश होते समय सुनने को मिल सकते हैं।

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वित्तीय वर्ष : वित्तीय वर्ष को फाइनेंशियल वर्ष के नाम से भी जाना जाता है। यह एक अवधि है जो सरकार अपने लेखांकन और बजट उद्देश्यों के लिए उपयोग करती है। भारत और जापान में भी वित्त वर्ष की अवधि 1 अप्रैल से 31 मार्च होती है।

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वार्षिक वित्तीय विवरण : इसे ही हम आम तौर पर 'केंद्रीय बजट' कहते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार वित्तीय अवधि के लिए अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का एक स्टेटमेंट संसद में प्रस्तुत किया जाता है।

फाइनेंशियल बिल : केंद्रीय बजट में संसद के सामने दो विधेयक पेश किये जाते हैं, जिनमें वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक शामिल हैं। वित्त विधेयक नए करों को लागू करने या आगामी वित्तीय वर्ष के लिए किसी भी मौजूदा कर या मौजूदा कर की निरंतरता में बदलाव का प्रस्ताव है। विनियोग विधेयक यह एक प्रस्ताव है जो सरकार को कंसोलिडेटेड फंड से फंड निकालने की इजाजत देता है।

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कंसोलिडेटेड फंड : सरकार को मिलने वाली सभी राजस्व और उधार को इसी फंड में जमा किया जाता है।

आकस्मिकता या कंटिंजेंसी फंड : यह एक रिजर्व फंड है जिसे आपात स्थिति के लिए रखा जाता है।

पब्लिक अकाउंट : इसमें उन लेन-देन से धन शामिल होता है जिनमें सरकार बैंकर की तरह काम करती है।

राजकोषीय नीति : टैक्स और खर्च पर अपने फैसलों के जरिये अर्थव्यवस्था के लिए सरकार की योजना।

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मौद्रिक नीति : मुद्रा आपूर्ति और ब्याज दर पर अपने फैसलों के माध्यम से अर्थव्यवस्था के लिए सरकार की योजना।

अनुलाभ कर : किसी करदाता द्वारा वेतन के अलावा किसी कर्मचारी को दिए गए लाभ या प्रोत्साहन के लिए देय कर।

प्रतिभूति या सिक्योरिटीज लेनदेन कर : जब आप इक्विटी शेयर, डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट या अन्य प्रतिभूतियों को खरीदते या बेचते हैं, तो आपको प्रतिभूति लेनदेन कर का भुगतान करना होगा।

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कॉरपोरेट टैक्स : सक्रिय कॉर्पोरेट्स द्वारा भारत में होने वाली आमदनी पर कर।

शिक्षा उपकर (सेस) : शिक्षा उपकर से एकत्रित राशि का उपयोग भारत में सरकार द्वारा प्रायोजित शिक्षा फंडिंग के लिए किया जाता है।

स्वच्छ भारत उपकर : ये सभी कर योग्य सेवाओं पर लागू होता है और कुल जमा फंड भारत को स्वच्छ बनाने की वित्तीय पहल के लिए फंड में जोड़ा जाता है।

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गैर-कर राजस्व : भारत सरकार जनता को दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं से राजस्व हासिल करती है, जैसे बिजली, रेलवे, आदि।

कर उन्मूलन (Tax abatement) : निर्दिष्ट अवधि के लिए करों में छूट या कमी।

राजकोषीय घाटा : राजकोषीय घाटा तब होता है जब किसी सरकार का व्यय उसके राजस्व से अधिक होता है।

प्राथमिक घाटा : ब्याज भुगतान को राजकोषीय घाटे में घटा कर बचने वाला घाटा।

चालू खाता घाटा : जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक होता है।

राजस्व घाटा : यह तब होता है जब सरकार की वास्तविक प्राप्तियां बजट प्राप्तियों से कम होती हैं।

पूंजी प्राप्ति या व्यय : कोई भी प्राप्ति या व्यय जिसमें किसी संपत्ति को डिजोल्व करना या प्राप्त करना शामिल होता है, पूंजीगत खाते में आता है। विनिवेश एक पूंजी प्राप्ति है।

राजस्व प्राप्ति या व्यय : कोई भी प्राप्ति या व्यय जिसके परिणामस्वरूप संपत्ति का निर्माण या बिक्री न हो उसे राजस्व व्यय कहते हैं।

तरीके और साधन अग्रिम (WMA) : RBI राज्य और केंद्र सरकारों के लिए एक बैंकर का कार्य करता है। WMA एक ऐसा तरीका है जो उनके बीच रिसीट और जमा में उनके अंसुतल को अस्थायी सहायता प्रदान करता है।

सबवेंशन या राजकीय सहायता : कुछ उद्योगों और आम जनता के विकास को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी के रूप में उपलब्ध कराई गई सहायता।

पास थ्रो स्टेटस : दोहरे कर से बचने के लिए कुछ आय को 'स्टेटस से जाने' दिया जाता है। उदाहरण के लिए, म्यूचुअल फंड।

वित्तीय समावेशन : यह सस्ती दरों पर बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए निम्न आय और पिछड़े समूहों तक पहुंच सुनिश्चित करने का एक साधन है।

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