नयी दिल्ली। मोदी सरकार का काफी जोर डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने पर रहा है। 2016 में हुई नोटबंदी के बाद लोगों को भी इसकी जरूरत महसूस होने लगी। इससे डिजिटल लेन-देन में बूम आया। इतना ही नहीं सरकार अब डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार करने के साथ-साथ कैश लेन-देन को सीमित करने के लिए भी उपाय कर रही है। कैश लेन-देन को लेकर सरकार ने कई नियमों को सख्त बना दिया है। अगर आप भी कैश में ज्यादा लेन-देन करते हैं तो सावधान हो जाएं, क्योंकि अगर आपने जाने-अनजाने नियमों का पालन नहीं किया तो इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आपके घर आएगा। आपको जुर्माना भी देना पड़ सकता है। जानते हैं क्या कैश लेन-देन के नियम।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आप घर में कितना भी कैश रख सकते हैं। कैश रखने की फिलहाल कोई लिमिट तय नहीं की गयी है। मगर आपके पास जो कैश है, उसका सही सोर्स और जानकारी बतानी होगी। बिलकुल ऐसा ही नियम गोल्ड के लिए भी लागू होता है। आप जितना चाहे गोल्ड रख सकते हैं, मगर उसका सही सोर्स बताना होगा।
नये नियमों के अनुसार आप कैश में 2000 रु से ज्यादा का न तो चंदा दे सकते और न ही दान कर सकते। इसके अलावा यदि मेडिकल खर्च पर आप 5000 रुपये से ज्यादा बतौर कैश खर्च करते हैं तो आपको टैक्स छूट नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं अगर आप बिजनेस के लिए 10,000 रु से अधिक पैसा कैश में खर्च करते हैं तो उसे बतौर मुनाफा माना जाएगा। 20000 रु से ऊपर कैश में लोन लेने-देने पर मनाही है। नियम तोड़ने वाले से जुर्माना लिया जाएगा।
अब नियम यह भी है कि आप फॉरेन एक्सचेंज से 50,000 रु से अधिक पैसा नहीं ले सकते। यहां तक कि कैश में खरीदारी की लिमिट सिर्फ 2 लाख रुपये है। इससे अधिक की खरीदारी आप कैश में नहीं कर सकते। एक और अहम नियम यह है कि बैंक से साल में 2 करोड़ रुपये ज्यादा कैश निकालने पर आपको टीडीएस देना होगा। इनमें से किसी भी नियम को तोड़ने पर इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है।
जानकार बताते हैं कि घर में कैश रखने की लिमिट नहीं है, मगर उसका सोर्स साफ होना चाहिए। अगर उस कैश का सोर्स क्लियर न हो तो आपको उस पैसे के 137% तक जुर्माना देना होगा। कैश के अन्य नियमों में यदि आप बैंक के बचत खाते में 50000 रु से अधिक जमा करें तो पैन नंबर चाहिए होगा। यहां तक कि कैश में पे-ऑर्डर या डिमांड ड्राफ्ट बनवाने के लिए भी पैन की जरूरत होगी।
कैश से जुड़े इतने सारे और सख्त नियमों के कारण जानकार लोगों को दूसरे तरीकों से लेन-देन की सलाह दे रहे हैं। आपकी कोई चूक नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए बेहतर है कि उपलब्ध अन्य माध्यमों के जरिए लेन-देन करें। इस तरह आप जुर्माने से सुरक्षित रहेंगे।
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