नयी दिल्ली। जैसे-जैसे इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच बढ़ी है, वैसे-वैसे ही म्यूचुअल फंड और स्टॉक में निवेश करना आसान हुआ है। बहुत सारे निवेश ऐप और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म आ गए हैं जहां निवेशक आसानी से पैसा लगा सकते हैं। तेज नो-योअर-कस्टमर (केवाईसी) प्रोसेस एक और अच्छी सुविधा है। वास्तव में ये फाइनेंशियल ऐप निवेशकों को ट्यूटोरियल भी दे रहे हैं, जहां उनका फंड मैनेजरों के साथ वीडियो इंटरैक्शन होता है। अब मोबाइल ऐप पर कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट और यहां तक कि इक्विटी शेयरों मे भी निवेश की सुविधा मिलती है। मगर मोबाइल ऐप के जरिए निवेश करने पर जोखिम भी हैं, जिन पर आपको ध्यान देना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 जोखिमों के बारे में।
अगर आप किसी ऐसी ऐप से पहली बार म्यूचुअल फंड आदि में निवेश कर रहे हैं या अभी अपने प्रारंभिक निवेश वर्षों में हैं तो आपको किसी से सलाह लेने और मार्गदर्शन की जरूरत है। हालांकि कई ऐप बहुत सारा रीडिंग मैटेरियर और निवेश गाइड वगेरह प्रदान करते हैं, मगर आपको किसी भी हाल में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। इससे आपको फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकता है।
कुछ ऐप के अपने छिपे हुए एजेंडे होते हैं। उदारहण के लिए ऐप का किसी म्यूचुअल फंड कंपनी के साथ टाई-अप हो सकता है और वो ऐप आपको उसी म्यूचुअल फंड को अच्छा भी बताएगी। यह कानूनी तौर पर सही नहीं है, मगर कुछ ऐप इस रणनीति का सहारा ले रही हैं। इससे नौसिखिए निवेशकों को चकमा दिया जा सकता है। ये एक तरह से किसी फंड की तरफ निवेशक को प्रेरित करना है।
निवेश करने से पहले कई फैक्टरों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। निवेश एप्लिकेशन आपके डेब्ट, टैक्स स्थिति, अन्य निवेश आदि पर विचार नहीं करते। मगर आपको खुद इन चीजों पर ध्यान देना होगा। एक बात और क्रेडिट कार्ड के साथ निवेश करना बहुत बुरा आइडिया है। क्योंकि इससे आपका रिटर्न बहुत कम हो सकता है। जो रिटर्न आपको मिलेगा उसमें से आपको ब्याज भी चुकाना पड़ सकता है।
कई निवेश ऐप ने बाजार की तेज स्थितियों के दौरान सेवाएं शुरू कीं। इसलिए ऐप उपयोगकर्ता विश्वास की झूठी भावना के चक्कर में फंस सकते हैं, क्योंकि उन्हें उस ऐप पर सिर्फ अच्छे-अच्छे रिटर्न देखने को मिलेंगे। जबकि भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव या किसी भी अस्थिरता के लिए तैयार होना जरूरी है। ऐसे में आप बुरे समय पर खराब निवेश निर्णय लेकर पैसा खो सकते हैं।
निवेश एप्लिकेशन अक्सर एक प्रश्नावली और एल्गोरिथ्म के जरिए निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता को निर्धारित करने का प्रयास करते हैं। मगर ये सही तरीका नहीं है। इससे आप सच में नहीं जान पाएंगे कि आप कितना जोखिम ले सकते हैं। बल्कि आपको किसी अच्छे सलाहकार की मदद जोखिम (Risk Factor) को समझना होगा।
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