नयी दिल्ली। 1 अप्रैल से 6 सरकारी बैंक समाप्त हो गए। इन सरकारी बैंकों का अन्य 4 सरकारी बैंकों में विलय हो गया। बता दें कि योजना के तहत ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का विलय पंजाब नेशनल बैंक में, सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में, इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में और आंध्र बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय हो गया है। वैसे तो उन 6 बैंकों, जिनका विलय हुआ है, के ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ा। सिवाय इसके की वे अब उन बैंकों के ग्राहक बन गये हैं जिनमें उनके बैंक का विलय का हुआ है। मगर कुछ औपचारिक्ताएं हैं जिनके चलते ग्राहकों का थोड़ा काम बढ़ गया है। जानकारी के लिए बता दें कि पिछले तीन सालों में सरकार ने कई पीएसयू बैंकों का विलय किया है। कुल 27 बैंकों का आपस में विलय किया गया है, जिससे अब केवल 12 ही सरकारी बैंच बचे हैं।
गौरतलब है कि ग्राहकों के जमा पैसे पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, मगर कुछ चीजें हैं जिन पर ग्राहकों को ध्यान देना होगा। जैसे कि अपडेशन जैसे कुछ जरूरी चीजें हैं, जो ग्राहकों को करनी होंगी। इसलिए आपको बैंक की तरफ से आने वाले सभी ईमेल और मैसेज पर ध्यान देना होगा, ताकि कोई भी जरूरी जानकारी आपसे छूट न जाए। बैंकिंग जानकार बताते हैं कि बैंकों के विलय के बाद आपका अकाउंट नंबर या आईएफएससी कोड बदल सकता है। यदि ऐसा होता है तो आपको अपना बदला हुआ खाता नंबर या आईएफएससी म्यूचुअल फंड या बीमा कंपनियों (जहां अगर आपने निवेश या पॉलिसी ली है) को देना जरूरी होगा।
इसके अलावा अगर आपको आयकर रिटर्न आना है तो आपको ये जानकारी और नये नंबर आयकर विभाग में भी देना होगा। एक बात और ध्यान देने वाली है। विलय के बाद दो बैंकों की शाखाएं एक ही बैंक की हो जाती हैं। ऐसा संभव है कि दो शाखाएं करीब-करीब हों और एक में आपको खाता हो। और आस-पास दो शाखाएं होने के कारण बैंक एक शाखा को बंद करने का फैसला ले ले। ऐसे में आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कहीं वही शाखा बंद न हो जाए जिसमें आपका खाता है। पूरी जानकारी के साथ चालू शाखा में अपना खाता रखें।
बता दें कि बैंक आपसे सर्विस चार्ज वसूलता है। हो सकता है नये बैंक में आपको अधिक सर्विस चार्ज देना होगा। इतना ही नहीं आपके निवेश पर भी इसका असर पड़ सकता है। मगर जब तक नया बदलाव नहीं होता तब तक आपको पुरानी ब्याज दर पर ही ब्याज मिलेगा और किसी भी तरह के लोन पर पुरानी दर पर ही ब्याज देना होगा। 1 अप्रैल से लागू हुई बैंकों के विलय की योजना पिछले साल अगस्त में घोषित हुई थी। बैंकों के विलय की योजना सरकार के एक बड़े लक्ष्य का हिस्सा है। देश के सार्वजनिक बैंकिंग क्षेत्र में बड़ा एकीकरण 2025 तक भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
More Articles
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?
- ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित
- ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान