नई दिल्ली, जुलाई 21। भारतीय रिजर्व बैंक ने पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर बैंकों में अकाउंट को ऑपरेट करने के लिए कुछ नियम बनाए हैं। इन नियमों के मुताबिक ही बैंक आपको खातों से पैसे निकालनेऔर जमा करने की अनुमति देते हैं। आरबीआई के नियम के अनुसार अगर व्यक्ति 10 सालों तक अपने बैंक खाते से कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं करता है तो खाते में जमा राशि को अनक्लेम्ड राशि मान ली जाती है। बैंक अनक्लेम्ड रुपयों को डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में जमा कर देता है।

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हर प्रकार के अकाउंट के लिए है नियम

यह नियम हर तरह के अकाउंट के लिए मान्य होता है। अगर किसी भी करंट अकाउंट, सेविंग अकाउंट , एफडी या रेकरिंग डिपॉजिट अकाउंट में पिछले दस सालों में कोई ट्रांसेक्शन नहीं हुई है तो वह खाता अनक्लेम्ड घोषित हो जाती है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार हर साल अनक्लेम्ड अमाउंट की संख्या में बढ़ती जा रही है। आरबीआई के अनुसार पिछले साल यह आंकड़ा 40 हजार करोड़ रुपये का था।

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बंद हो जाता है अकाउंट

नियम के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपने बैंक खाते में दो साल तक लेनदेन नहीं करता है तो बैंक उसका खाता इनएक्टिव कैटेगरी में डाल देता है। अगर दो साल बाद और अगले 8 साल तक खाते में कोई लेनदेन नहीं होती है तो इस स्थिति में आपका खाता अनक्लेम्ड अमाउंट के कैटेगरी में डाल दिया जाएगा।  

कैसे वापस पा सकते हैं रुपया

अगर आपके घर का किसी सदस्य का खाता निष्क्रिय हो गया है और तो इसमें पड़ी राशि पर आसानी से क्लेम किया जा सकता है। मान लीजिए आपके परिवार के किसी सदस्य का खाता बैंक में था और अब वह दुनिया में नहीं है, तो नॉमिनी आसानी से निष्क्रिय हुए खाते का पैसा क्लेम कर सकता है।

अगर खाते का न हो कोई नॉमिनी

अगर किसी परिवार के सदस्य ने खाते में नॉमिनी का नाम नहीं डाल रखा है तो आप उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र  के मदद से पैसे को क्लेम कर सकते हैं। बैंक आपका बैकग्राउंड और खाताधआरक की वसीहत जांच करता है, इसके बाद बैंक पैसा वापस करता है।