नई द‍िल्‍ली: अगर आप भी माइक्रो एटीएम का इस्‍तेमाल करते है तो आप ये खबर जरुर पढ़ लें। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और बैंक ऑफ बड़ौदा ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। दरअसल एसबीआई और बीओबी ने अपने बैंक के ग्राहकों को किसी दूसरे बैंक के माइक्रो-एटीएम से कैश विड्रॉल सीमित कर दिया है। इन दोनों बैंकों ने माइक्रो-एटीएम से कैश निकालने की संख्या घटा कर 4 कर दी है।

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जानें क‍ितनी म‍िली ट्रांजैक्शन की सुव‍िधा

बता दें कि माइक्रो एटीएम उन जगह पर काम करते हैं, जहां पर किसी भी बैंक का एटीएम नहीं होता है। जानकारी के मुताबिक, बैंक ऑफ बड़ौदा नियमों में बदलाव कर दूसरे बैंक के माइक्रो-एटीएम से हर महीने 4 ट्रांजैक्शन करने की सुविधा दे रहा है। वहीं एसबीआई ने केवल 1 ट्रांजैक्शन करने की सुविधा दी है। हालांकि जो एसबीआई ग्राहक सरकार की डीबीटी स्कीम के तहत नहीं आते हैं, वो हर महीने 5 ट्रांजेक्शन कर सकते हैं।

जान लें माइक्रो एटीएम की खासियत
  •  माइक्रो एटीएम उन जगह पर काम करते हैं, जहां पर किसी भी बैंक का एटीएम नहीं होता है।
    • माइक्रो एटीएम देखने में बिल्कुल उस स्वाइप मशीन की तरह लगता है, जिसका उपयोग करके आप दुकानों पर अपने कार्ड की मदद से ऑनलाइन भुगतान करते हैं।
      • हालांकि, इसका काम स्वाइप मशीन से कहीं अधिक होता है।
        • बता दें कि यह माइक्रो एटीएम जीपीआरएस इनेबल्ड होता है।
          • माइक्रो एटीएम का उपयोग ठीक उसी तरह से होता है, जैसे आप एक एटीएम का उपयोग करते हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि एटीएम से पैसे निकालने के लिए आपको एटीएम के पास जाना पड़ता है, जबकि माइक्रोएटीएम खुद आपके पास आता है।
            • बैंकिंग कॉरस्पान्डन्ट हैंडलिंग माइक्रो एटीएम लोकल एजेंट्स और दुकानदारों के पास होते हैं।
              • ध्‍यान देने वाली बात यह है कि माइक्रो-एटीएम में आधार नंबर के जरिए पैसा मिलता है।
              • जानें क्यों लिया गया यह फैसला?
                • बता दें कि बैंकों ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि ग्राहक एक बार में बड़ी रकम निकालने के बजाए छोटी-छोटी रकम निकालते हैं।
                  • 10 हजार रुपये एक बार निकालने के बजाए 2 हजार रुपये के 5 ट्रांजैक्शन करते थे।
                    • इस कारण बैंकों को भी नुकसान होता है।
                      • वहीं दूसरे बैंक के माइक्रो-एटीएम का प्रयोग करने पर उस बैंक को 15 रुपये देने पड़ते थे।
                        • बैंकों के इस कदम से आधार-एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) के जरिए ट्रांजैक्शन में भारी कमी आई है।
                          • हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में एईपीएस ट्रांजैक्शन 9 फीसदी गिरकर 20.1 करोड़ से पर आ गया है। वहीं जुलाई में यह ट्रांजैक्शन 22 करोड़ था।